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100 साल तक रहा बैन: रामलीला को वर्षों के वनवास से लाए थे सेठ सीताराम, औरंगजेब ने लगा दी थी मंचन पर पाबंदी

Tue, 27 Sep 2022 06:59 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 27 Sep 2022 06:59 AM IST
सार

बादशाह अकबर के शासनकाल में दिल्ली में व्यापारियों की पहल पर रामलीला मंचन की शुरूआत हुई। बाद में औरंगजेब की पाबंदी के कारण हिंदुओं को रामलीला का मंचन बंद करना पड़ा। 

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Aurangzeb imposed ban on Ramlila after 100 years Seth Sitaram gave financial help and got it started again at
रामलीला - फोटो : amar ujala

विस्तार

दिल्ली में रामलीलाओं का इतिहास बहुत पुराना है। 17वीं शताब्दी में शुरू हुई रामलीला मुगल बादशाह औरंगजेब की पाबंदी के कारण करीब सौ साल तक बंद रही। बाद में आर्थिक संकट से जूझ रहे उनके वंशज मोहम्मद शाह रंगीला ने जब दिल्ली के सेठ सीताराम से मदद मांगी तो उन्होंने रामलीला शुरू करने की शर्त रख दी। तब जाकर सालों बंद पड़ी रामलीला दोबारा दिल्ली में शुरू हो पाई।

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राजधानी में दो सौ वर्ष से अधिक समय से मंचन करा रही श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष अजय अग्रवाल बताते है कि 1600 ईसवी से पहले दशहरे के मौके पर देशभर में भगवान राम के बारे में गाकर बताया जाता था। इस कड़ी में दिल्ली में भी दशहरा के दौरान रामकथा होती थी। इस बीच बादशाह अकबर के शासनकाल में दिल्ली में व्यापारियों की पहल पर रामलीला मंचन की शुरूआत हुई। बाद में औरंगजेब की पाबंदी के कारण हिंदुओं को रामलीला का मंचन बंद करना पड़ा। वर्षों बाद युद्ध में सब कुछ लुटने के बाद मुगल शासक मोहम्मद शाह रंगीला ने सेठ सीताराम से आर्थिक मदद मांगी। सेठ सीताराम ने मदद करने के एवज में रामलीला मंचन करने की शर्त रखी, जिसे रंगीला ने मान लिया। इसके बाद सेठ सीताराम की हवेली में रामलीला का मंचन हुआ। बाद में रामलीला मैदान में इसका मंचन शुरू हुआ।

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अंग्रेजों के कारण रामलीला मैदान में बंद हुआ मंचन
रामलीला महासंघ अध्यक्ष अर्जुन कुमार कहते हैं कि ब्रिटिश शासन में रामलीला मैदान में अंग्रेजों ने सेना की छावनी बनाई तो वहां मंचन बंद करना पड़ा। इसके बाद दोबारा हवेलियों में मंचन होने लगा। वर्ष 1911 में पुरानी दिल्ली के व्यापारियों ने मदन मोहन मालवीय से रामलीला मंचन भव्य तौर पर कराने की शुरूआत कराने का आग्रह किया। इस बारे में उन्होंने अंग्रेस शासन से बात की और उनके प्रयासों से दोबारा रामलीला मैदान में रामलीला शुरू हुई जो तब से बदस्तूर जारी है। श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित एतिहासिक रामलीला को देखने के लिए एक समय देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित तमाम हस्तियां पहुंचती थीं।

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तो तुलसीदास ने कराया था रामलीला मंचन
महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार के अनुसार एक बार जन्माष्टमी पर महर्षि तुलसीदास ब्रज में गए हुए थे। वहां जगह-जगह रासलीला हो रही थी। तब उनके मन में रामलीला मंचन का विचार आया। ऐसा माना जाता है कि अकबर के शासनकाल में 1600 ईसवीं में कनाट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर परिसर में रामलीला का मंचन करने की शुरुआत की थी। यहां कुछ सालों तक रामलीला का मंचन हुआ। इसके बाद रामलीला मैदान में मंचन कराने की शुरूआत की गई, लेकिन औरंगजेब ने रामलीला मैदान में ही नहीं, बल्कि रामलीला मंचन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।

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