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आधे-अधूरे दस्तावेज ने कैग का काम अटकाया, तीन प्राधिकरणों के ऑडिट का मामला

Fri, 06 Jul 2018 09:50 AM IST
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 06 Jul 2018 09:50 AM IST
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audit case of three authorities- incomplete document restrained CAG work

प्राधिकरण के ऑडिट का काम आधे-अधूरे दस्तावेज ने लटका दिया है। प्राधिकरण के अलग-अलग विभागों से मांगी गई जानकारी पूरी तरह से नहीं मिलने से ऑडिट टीम के काम की प्रगति बेहद धीमी है। यही वजह है कि इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को देने की बात की जा रही है। यही नहीं मुख्यालय की ओर से मामले की जानकारी अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी दी जाएगी।

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दरअसल, पहले चरण में कैग ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अंतिम पांच वित्तीय वर्ष के ऑडिट का काम शुरू किया था, लेकिन बाद में इसकी सीमा बढ़ाकर 2005-06 तक कर दी गई थी यानी 2005 से लेकर अब तक के सभी रिकॉर्ड सीएजी खंगाल रही है। आलम यह है कि नोएडा प्राधिकरण के अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड और दस्तावेज टीम को नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ विभाग तो कैग के पूछे गए सवालों का जवाब तक देने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
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ऐसे में टीम के ऑडिट का काम प्रभावित हो रहा है। ऑडिट टीम ने इस बाबत सीईओ आलोक टंडन को भी बताया है। बावजूद टीम को सहयोग नहीं मिल पाने से अब बात मुख्यालय तक जाने की नौबत आ गई है। यही नहीं मुख्यालय की ओर से अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी इस बात की जानकारी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्राधिकरणों के बेहतर तरीके से कैग से ऑडिट कराने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दस्तावेज के अभाव ने कैग के काम में बाधा पहुंचाने का काम किया है।

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पहले भी महालेखाकार ने शासन को दी थी जानकारी

इससे पहले भी महालेखाकार की ओर से अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी गई थी। मामले में 2005-06 से वार्षिक लेखा जमा करने सभी प्राधिकरणों को कहा गया था।

राज्य सरकार को तय करना था प्रारूप
सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को राज्य सरकार के सहयोग से तय किए गए प्रारूप में 2005-06 से संशोधित कर वार्षिक लेखा प्रस्तुत करना है। इससे भी काम की प्रगति बेहद धीमी है।

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