आप के आक्रामक रवैये से कांग्रेस में गठबंधन के खिलाफ माहौल, कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हो रहे नाराज
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कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन में देरी व आप के रवैये से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता काफी नाराज हैं। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गठबंधन की बातचीत के जरिए कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाए हुए हैं। इससे कांग्रेस की छवि धूमिल हो रही है। हरियाणा व पंजाब में गठबंधन न होने पर आप नेता कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाएंगे, इससे भी पार्टी असहज रहेगी। ऐसे में कांग्रेस को आप के साथ गठबंधन करने से दूर ही रहना पार्टी के हित में होगा। फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो निर्णय लेंगे, पार्टी नेता उसी पर अमल करेंगे।
आप से गठबंधन पर प्रदेश के अधिकांश बड़े नेता खिलाफ रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति के चलते जब गठबंधन की बात चली तो सभी ने एकमत से निर्णय राहुल गांधी पर छोड़ दिया। चार-तीन सीट के फॉर्मूले पर रजामंदी बनी तो आप ने हरियाणा व पंजाब का पेंच फंसा दिया। इसके अलावा आप ने प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित सभाओं में भाजपा सहित कांग्रेस पर भी आक्रामक रुख अपना रखा है। दिल्ली के एक पूर्व सांसद का कहना है कि एक तरफ गठबंधन की बात दूसरी तरफ भाषणों में कांग्रेस के खिलाफ अभियान से कांग्रेसी कार्यकर्ता हताश हैं। उनका कहना है कि हमने तीन सीटें ले भी ली और दो पर विजय हासिल कर ली तो भी कांग्रेस को ज्यादा फायदा मिलने वाला नहीं है।
गठबंधन टूटा तो नेता किस मुंह से मांगेंगे वोट
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि गठबंधन के बाद कांग्रेस का विधानसभा की तीस सीटों पर दावा बनेगा। क्या आप विधानसभा में इतनी सीटें कांग्रेस को देगी। यह संभव नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को विधानसभा का चुनाव अपने स्तर पर लड़ना पड़ेगा। एक साल में ही गठबंधन टूटेगा और फिर हम किस प्रकार से आप के खिलाफ वोट मांगने मतदाताओं के पास जाएंगे।
आप के खिलाफ माहौल कांग्रेस के लिए शुभ संकेत
कांग्रेस के कई नेताओं का यह भी मानना है कि जिस प्रकार दिन प्रति दिन दिल्ली में आप के खिलाफ माहौल बन रहा है, वह आने वाले समय में कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है। ऐसे में गठबंधन कांग्रेस की दिल्ली में वापसी में बाधा बनेगा। इसके अलावा आप की 49 दिन की सरकार बनवाकर कांग्रेस को क्या मिला, कांग्रेस पहली बार दिल्ली में जीरो पर पहुंच गई।