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अटाली में फिर साजिश, धार्मिक स्थल पर पथराव

Thu, 23 Jul 2015 08:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 23 Jul 2015 08:30 AM IST
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Atali communal elements in the plot, then threw stones at religious places.

शांति की ओर अग्रसर अटाली गांव में एक बार फिर मंगलवार देर रात सांप्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश रची गई। उपद्रवियों द्वारा अरुआ गांव के रास्ते पर बने एक धार्मिक स्थल पर पथराव किया।

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धार्मिक स्थल की देखरेख करने वाले शख्स ने पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सूचित किया। इसके बाद धार्मिक स्थल पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभाल ली।

धार्मिक स्थल की देखरेख करने वाले शख्स का कहना है कि पुलिस ने इस मामले की शिकायत अपने रजिस्टर में लिखी थी, लेकिन पुलिस ऐसी किसी भी घटना से इंकार कर रही है।
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कौन लगा रहा अटाली के अमन में आग?

Atali communal elements in the plot, then threw stones at religious places.

जानकारी के मुताबिक अटाली गांव से करीब एक किलोमीटर दूर अरुआ गांव के रकबे पर पुराना धार्मिक स्थल है। इस मंगलवार देर रात स्थल की देखरेख करने वाले खुशीनाथ, अटाली निवासी ज्ञानेंद्र उर्फ ज्ञानी और सुनील सोए हुए थे।

खुशीनाथ ने बताया कि रात करीब 11 बजे दर्जनभर उपद्रवियों ने धार्मिक स्थल पर पथराव शुरू कर दिया। लगभग दो घंटे तक पथराव जारी रहा। धार्मिक स्थल में मौजूद लोगों ने छत पर चढ़कर जान बचाई।

इस बीच खुशीनाथ ने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचित कर दिया। सूचना मिलते ही जिप्सी से चार पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए। इन्हें देखते ही उपद्रवी भाग निकले। इस दौरान पुलिस ने धार्मिक स्थल में मौजूद लोगों की शिकायत रजिस्टर में दर्ज की।

ईद पर कम हुए थे गिले-शिकवे

Atali communal elements in the plot, then threw stones at religious places.

अटाली गांव में विवादित धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर दो माह से तनाव गहराया हुआ है। इस निर्माण को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए थे। झगड़े के दौरान आगजनी व पथराव भी हुए थे।

इसके बाद एक संप्रदाय विशेष के लोग गांव छोड़कर बल्लभगढ़ स्थित राहत शिविर में शरण लिए हुए थे। काफी मान-मनौव्वल के बाद संप्रदाय विशेष के लोग माने और गांव लौट गए।

इसके बाद एक जुलाई को दोबारा पथराव के बाद मामला फिर भड़क गया। भारी तनाव के बीच संप्रदाय विशेष के लोग दोबारा गांव छोड़ गए।

हालांकि पीछे कुछ दिनों से तनाव धीरे-धीरे कम हो रहा था। ईद के मौके पर दोनों समुदाय गिले-शिकवे कम हो गए थे, लेकिन गांव में शांति बहाली असामाजिक तत्वों को रास नहीं आ रही है।

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