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उत्तर भारत के सभी राज्यों को पराली के धुएं से निपटने के लिए मिलकर काम करना होगा : अरविंद केजरीवाल
Tue, 13 Oct 2020 06:29 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 13 Oct 2020 06:29 PM IST
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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter @CMODelhi
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में पराली की समस्या से निपटने के पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार बॉयो डीकंपोजर घोल के छिड़काव का मंगलवार को शुभारंभ किया। उतरी दिल्ली जिले के हिरंकी गांव से इसकी शुरूआत करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के करीब 700 से 800 हेक्टेयर जमीन पर इस घोल का नि:शुल्क छिड़काव किया जाएगा।
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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमें इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर अरोप-प्रत्यारोप लगाने की जरूरत नहीं है। बल्कि सभी राज्य सरकारों को एक-दूसरे के साथ मिल कर काम करना होगा। यदि दिल्ली सरकार कर सकती है, तो बाकी राज्य सरकारें भी कर सकती हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में पिछले 10 महीने से प्रदूषण नियंत्रण में था। लेकिन पड़ोसी राज्यों में जलाई जा रही पराली का धुआं अब दिल्ली के अंदर पहुंचने लगा है। मुझे पराली से होने वाले प्रदूषण को लेकर दिल्ली के साथ पंजाब और हरियाणा के लोगों की भी चिंता है। क्योंकि पड़ोसी राज्यों में जलाई जाने वाली पराली के धुएं का असर दिल्ली आते-आते कुछ हद तक कम हो जाता है। लेकिन हरियाणा और पंजाब के लोगों पर हर साल इसका गहरा असर देखने को मिलता है।
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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में करीब 10 दिन पहले यह घोल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। घोल बन कर अब तैयार हो गया है। दिल्ली में करीब 700-800 हेक्टेयर जमीन है। जहां गैर बासमती धान उगाया जाता है और वहां पर पराली निकलती है।
किसानों को अगली फसल की बुवाई से पहले न चाहते हुए भी कई बार उस पराली को जलाना पड़ता था। किसानों को भी पता है कि पराली जलाने से उनके खेतों की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है। लेकिन इस पराली को जलाने की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए अब यह घोल खेतों में छिड़का जाएगा। किसानों को इसके लिए कोई कीमत देने की जरूरत नहीं है।
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पूसा के वैज्ञानिक पिछले 4-5 साल से इस घोल को बनाने पर प्रयोग कर रहे हैं। उम्मीद है कि इंस्टीट्यूट का दावा सही है और इससे किसानों को फायदा होगा।
पराली जलाने से दुखी हैं किसान
पराली जलाने से पंजाब, हरियाणा और उतर प्रदेश के किसान दुखी हो रहे हैं। दिल्ली की जनता दुखी हो रही है और सारी सरकारें आंख बंद करके बैठी हुई हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि बाकी सभी सरकारें भी पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम को लेकर ठोस कदम उठाएंगी। ताकि किसानों के साथ सारे उत्तर भारत को प्रदूषण से मुक्ति मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि दिल्ली सरकार अपने किसानों के 800 हेक्टेयर खेत में घोल का छिड़काव कर सकती है, तो बाकी सरकारें भी कर सकती हैं। जब हमने इस तकनीक के इस्तेमाल की शुरूआत की थी, उस दौरान केंद्र सरकार ने संपर्क करने की काफी कोशिश की थी। अगर केंद्र सरकार चाहती तो इस साल कुछ तो कम कर सकते थे। वहीं मौके पर उपस्थित दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भी प्रदूषण को कम करने के लिए सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को मिलकर काम करने की अपील की है।
स्थानीय बीडीओ ने किसानों से किया संपर्क
हिरंकी गांव के किसान प्रकाशवीर के 3 एकड़ खेत में मंगलवार को डीकंपोजर घोल का छिड़काव किया गया। प्रकाशवीर ने बताया कि 3 दिन पहले स्थानीय बीडीओ मनोज कुमार शर्मा ने उनसे संपर्क कर उन्हें अपने खेतों में डी कंपोजर घोल छिड़काव के लिए तैयार किया था। उन्होंने बताया कि 11 से 25 नवंबर के बीच गेहूं की बुवाई करानी है। अगर इस साल उनके खेतों में धान की पराली जलाने की प्रक्रिया सफल रही तो अगले साल वह फिर से इसका इस्तेमाल करेंगे।