क्या अपने सिपाहियों पर भरोसा नहीं करते केजरीवाल?
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दिल्ली में आम आदमी पार्टी दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग को लेकर अब जमीनी लड़ाई शुरू करने वाली है। भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाने वाली आम आदमी पार्टी थोड़ी टेंशन में दिख रही है।
'आप' के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर रैली के दौरान कहा था कि भाजपा चुनाव कराने से भाग रही है और जोड़तोड़ की सरकार बनाने की फिराक में हैं।
उसके कुछ दिन बाद ही ऐसी सुगबुगाहट हुई कि आप के पांच विधायक भाजपा में जाने को तैयार हैं। उन्हें बड़े पदों का लालच दिया जा रहा है। इसके बाद आम आदमी पार्टी में हलचल मच गई और केजरीवाल ने अपनी टीम की परेड कराई।
आखिर क्या है केजरी की मुश्किल?
लोकसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद यह तीसरा मौका जब केजरीवाल ने अपने सभी विधायकों की परेड कराई है। भाजपा की ओर से विधायकों को तोड़ने की खबरों को गलत साबित करने के लिए केजरीवाल ने इस बार विधानसभा में अपने साथियों की परेड कराई।
इसके पहले केजरीवाल ने राष्ट्रपति व उपराज्यपाल के सामने भी अपने विधायकों को पेश किया था और दावा किया था कि उनके विधायक कहीं नहीं जाने वाले हैं।
माना जा रहा है कि केजरीवाल की इस मुश्किल के पीछे सबसे बड़ी वजह उन्हें अपने विधायकों पर भरोसा न होना है। उन्हें खुद ही ऐसा महसूस होने लगा है कि कहीं उनका कोई साथी फूटने वाला तो नहीं है। इस बात का आरोप कांग्रेस ने भी लगाया था कि अगर केजरीवाल को अपनी टीम पर इतना ही भरोसा है तो बार-बार उन्हें परेड की जरूरत क्यों पड़ती है?
अपने ही बयान भूल गए केजरीवाल?
दिल्ली में चुनाव कराने हैं या फिर सरकार बनानी है इस पर भाजपा ने लगातार अपना रुख बदला है। इससे सबसे ज्यादा टेंशन आम आदमी पार्टी को ही है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर कहा था कि चुनाव में जितनी देरी होगी उनकी सीटें उतनी ही बढ़ेंगी।
अगर केजरीवाल की इस बात में वाकई सच्चाई है तो उन्हें अपने विधायकों की परेड कराने की क्या जरूरत है। यह सवाल उस वक्त भी उठा था।
शनिवार को विधानसभा में हुई विधायकों की बैठक में पांच विधायकों ने यह कहा कि उन्हें भाजपा की ओर से मंत्री और चेयरमैन पद तक का ऑफर मिला था। AAP के इन आरोपों पर भाजपा ने प्रहार करते हुए कहा था कि अगर उनके पास सबूत हैं तो पेश करें।
तो ये है AAP की सबसे बड़ी टेंशन!
एक समय ऐसा भी था जब कांग्रेस में फूट के सुर उठने लगे थे। कहा जा रहा था कि कांग्रेस के मुस्लिम विधायक पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं और वे अलग गुट बनाकर भाजपा को सरकार बनाने में मदद करेंगे।
हालांकि इसके बाद दिल्ली में पोस्टरवार छिड़ा और फिर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने अपने सभी विधायकों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एकजुट होने का संकेत दिया था।
वहीं, भाजपा में अब तक नेताओं के बीच इसी बात पर सहमति नहीं बनी है कि सरकार बनानी है या फिर चुनाव कराने हैं। भाजपा के इस रुख से सबसे ज्यादा टेंशन 'आप' को ही हो रही है।
सूत्रों के अनुसार 'आप' नेताओं का मानना है कि अगर भाजपा विधायकों को तोड़ने में कामयाब रही तो इससे उनकी आगे की चुनावी रणनीति बिगड़ सकती है। इससे जनता के बीच गलत संदेश जाएगा और पार्टी की छवि भी खराब होगी।