9 दिनों से चल रहे ड्रामे का पटापेक्ष, केजरीवाल से नहीं मिले एलजी, बीजेपी नेताओं से नहीं मिले सीएम
पिछले नौ दिन से राजनिवास और दिल्ली सचिवालय में चल रहे ड्रामे का पटापेक्ष हो गया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भविष्य में होने वाली बैठकों में आने और कामकाज में सहयोग का आश्वासन दे दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य ने अपना विरोध धरना खत्म कर दिया।
उधर, सरकार के धरने के विरोध में बैठे भाजपा विधायकों ने भी सचिवालय में अपना धरना खत्म कर दिया। सभी पक्ष इसे अपनी विजय के रूप में व्याख्यान कर रहे हैं। किसी को भी इससे कोई लेना देना नहीं कि आखिर इन दिनों आम लोगों को कितनी परेशानी हुई।
मुख्यमंत्री ने धरना खत्म होने के बाद कहा कि वे धरने पर नहीं थे, बल्कि उपराज्यपाल से मिलने के लिए बैठे थे। सवाल यह है कि यदि उपराज्यपाल से मिलने के लिए बैठे थे तो अब क्यों बिना मिले धरना खत्म कर दिया।
उधर, भाजपा के विधायक भी केजरीवाल से मिले बिना जाने के तैयार नहीं थे और अब बिना मिले धरना खत्म क्यों कर दिया। स्पष्ट है कि यह मात्र राजनीति ड्रामा था और दोनों ही पक्ष अब धरना खत्म होने के पीछे अपनी जीत बता रहे हैं।
आम लोगों ने इन दोनों के धरनों को ड्रामे के ज्यादा तवज्जो नहीं दी
जीत किस की हुई यह तो वे ही जानते हैं, लेकिन इतना जरूर है कि आम लोगों ने इन दोनों के धरनों को ड्रामे के ज्यादा तवज्जो नहीं दी। आम आदमी पार्टी स्वयं को इस बात की तस्सली दे रही है कि उसे पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा कई भाजपा नेताओं व सपा व अन्य पार्टियों का समर्थन मिल गया।
वहीं भाजपा विधायक इस बात को लेकर खुश है कि उन्होंने आप के धरने को खत्म करवाने में अहम भूमिका अदा की। अधिकारी इस बात पर खुश हैं कि उनके रवैये के चलते सरकार धरने पर बैठने को मजबूर हुई और उनकी अहमियत बढ़ी।
कुछ भी हो, लेकिन सरकार व अधिकारियों को अब सबक तो मिल ही गया कि बिना कारण अहम का मुद्दा बनाने से नुकसान ही है और संभवत: भविष्य में इस प्रकार की नौबत न आए।