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आरुषि की 9वीं बरसी:जेल से बाहर आएंगे आरुषि के माता-पिता
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Mon, 15 May 2017 08:36 PM IST
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आरुषि-हेमराज हत्याकांड के सोमवार को नौ वर्ष पूरे हो गए। हत्याकांड की 9वीं बरसी पर एक फिर लोगों ने दोनों को याद किया और श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर आरुषि के नाना सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन बीजी चिटनिस (85 वर्ष) ने उम्मीद जताई की जल्द ही उनकी बेटी नूपुर तलवार और दामाद राजेश तलवार जेल से बाहर आएंगे।
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सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन बीजी चिटनिस ने बताया कि हाईकोर्ट में आरुषि के माता-पिता (नूपुर व राजेश तलवार) द्वारा किए गए केस की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी है। 23 जनवरी 2017 को हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई है। चार माह से हाईकोर्ट द्वारा केस का फैसला लिखा जा रहा है। हाईकोर्ट से अब कभी भी फैसला आ सकता है।
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आरुषि केस की 9वीं बरसी पर उनके नाना सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन बीजी चिटनिस की आंखों में आठ वर्ष पूर्व हुई पोती की दर्दनाक मौत और उसकी हत्या के आरोप में जेल में बंद बेटी व दामाद का दर्द साफ महसूस किया जा सकता था। आरुषि के नाना को पूरी उम्मीद है कि हाईकोर्ट उनके पक्ष में फैसला सुनाएगा।
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बेटी की हत्या के आरोप में जेल में बंद उसके पिता राजेश तलवार और मां नूपुर तलवार को बरी हो जाएंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि इसके बाद भी पोती को इंसाफ दिलाने की उनकी लड़ाई चलती रहेगी।
सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन बीजी चिटनिस के अनुसार इस केस में उनके परिवार केसाथ बहुत गलत हुआ है। आरुषि उनके जेहन में हमेशा जिंदा रहेगी। अक्टूबर 2015 में आरुषि के नाना ने फेसबुक पर पोती को इंसाफ दिलाने और उसके माता-पिता पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए खुला पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ मीडिया पर सवाल खड़े किए थे।
सोशल मीडिया पर भी चल रहा अभियान
आरुषि कांड को लेकर सोशल मीडिया पर भी तेजी से अभियान चल रहा है। इस अभियान में देश-विदेश के लोग शामिल हैं। फेसबुक और ट्विटर के जरिए लोग आरुषि कांड पर अपने तर्क, सुबूत और जांच की गलतियों को उजागर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर आरुषि कांड को लेकर कई पेज बनाए गए हैं। इन पेज पर प्रतिदिन पोस्ट व वीडियो डाली जा रही हैं।
क़ातिल ज़िंदा है : एक थी आरुषि किताब का विमोचन
आरुषि कांड की नौवीं बरसी पर सेक्टर-6 स्थित एनईए सभागार में सोमवार दोपहर इस केस से जुड़ी किताब क़ातिल ज़िंदा है : एक थी आरुषि किताब का विमोचन किया गया। किताब के लेखक वरिष्ठ पत्रकार सुनील मौर्य हैं, जो शुरू से आरुषि केस की कवरेज कर रहे हैं। ये उनकी पहली किताब है।
इस मौकेपर वरिष्ठ पत्रकार शम्स ताहिर खान व सुप्रतिम बनर्जी, आरुषि नाम से अंग्रेजी में किताब लिख चुके प्रसिद्ध लेखक अविरुक सेन और एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बतौर मुख्य अतिथि किताब का विमोचन किया।
किताब के विमोचन अवसर पर लेखक सुनील मौर्य ने बताया कि ये किताब केस से जुड़ी अन्य किताबों से इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें हर चीज सुबूतों के साथ लिखी गई है। केस से जुड़ी तमाम फॉरेंसिक रिपोर्ट किताब में शामिल है। इसमें कई ऐसी गोपनीय रिपोर्ट हैं जो सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
केस से जुड़े लोगों के साक्षात्कार और उनकी राय को भी शामिल किया गया है। किताब में पुलिस ने जांच में कहां क्या गलतियां की और ये केस कैसे देश की सबसे रहस्यमयी मर्डर मिस्ट्री बन गया, इस बारे में विस्तार से सुबूतों के साथ बताया गया है। साथ ही केस से जुड़े लोगों के सभी सवालों का जवाब भी किताब में देने का प्रयास किया गया है।
आरुषि-हेमराज को दी श्रद्धांजलि
आरुषि कांड की नौवीं बरसी पर राजकीय डिग्री कॉलेज के छात्रों के संगठन चैलेंजर्स ग्रुप और निर्माण नोएडा के सदस्यों ने आरुषि व हेमराज को श्रद्धांजलि दी। इसका आयोजन डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. आरके गुप्ता द्वारा किया गया। संगठन के सदस्य ने सोमवार सुबह सेक्टर-25 जलवायु विहार स्थित आरुषि के घर के पास उसकेऔर हेमराज के नाम से लगे पौधों को पानी दिया। साथ ही मोमबत्ती जलाकर दोनों को श्रद्धांजलि दी।
15 मई 2008 की रात हुई थी हत्या
सेक्टर-25 में रहने वाले दंत चिकित्सक दंपति राजेश तलवार और नूपुर तलवार की 14 वर्षीय इकलौती बेटी आरुषि और उनके नौकर हेमराज की 15 मई 2008 की रात हत्या कर दी गई थी। आरुषि का शव 16 मई की सुबह उसके कमरे में बिस्तर से खून में लथपथ अवस्था में बरामद हुआ था। उसके कपड़े और बिस्तर अस्त-व्यस्त थे।
उस वक्त तक नौकर का शव नहीं मिला था। सबको लगा नौकर हेमराज हत्या कर फरार हो गया, लिहाजा पुलिस ने उसकी जांच शुरू कर दी। अगले दिन 17 मई की सुबह हेमराज का शव भी तलवार दंपति के छत पर कूलर की एक ग्रिल से ढका हुआ बरामद हो गया।
छत पर जाने वाले गेट पर ताला लगा था। आरुषि की तरह हेमराज की हत्या भी गला काटकर की गई थी। पुलिस ने विवादास्पद तरीके से अपनी कुछ दिन की जांच में तलवार दंपति को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। इसके बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर हो गया।
सीबीआई टीम ने अपनी जांच में तलवार दंपति को क्लीन चिट देते हुए इनकेतीन नौकरों को गिरफ्तार किया। हालांकि सीबीआई इनके खिलाफ भी पुख्ता सुबुत नहीं जुटा सकी। लिहाजा तीनों नौकर भी कोर्ट से बरी हो गए। कुछ समय बाद सीबीआई की जांच टीम बदल गई और उसने केस बंद कर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।
आरुषि के माता-पिता ने क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर माता-पिता को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी। फिलहाल दोनों डासना जेल में बंद हैं। इन्होंने खुद को सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और जल्द फैसला आने की उम्मीद है।