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युवती की मौत के मामले में अपोलो अस्पताल पर दस लाख का हर्जाना
Fri, 26 Jul 2019 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2019 05:58 AM IST
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apollo hospital
- फोटो : अमर उजाला
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मरीजों के उपचार में मानवता का भाव होना जरूरी है और यह अस्पतालों की जिम्मेदारी है। यह टिप्पणी राज्य उपभोक्ता आयोग ने इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल पर दस लाख रुपये का हर्जाना लगाते हुए की।
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एक 24 साल की युवती के पिता की याचिका पर आयोग ने यह फैसला सुनाया। इलाज में लापरवाही के कारण इस युवती की 2007 में मौत हो गई थी। हर्जाने की राशि याची को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
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आयोग के सदस्य अनिल श्रीवास्तव ने राज करण सिंह की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि जुर्माना लगने से अस्पताल प्रबंधन के रुख में बदलाव आएगा और वे मरीज को मनुष्य मानकर इलाज करेंगे। इलाज में मानवता का पुट बेहद जरूरी है और इसे व्यवहार में लागू किया जाना चाहिए।
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आयोग में याचिका दायर कर राज करण सिंह ने कहा था कि 2005 में उसकी बेटी का डायलिसिस हो रहा था और अस्वच्छ डाइलेटर के प्रयोग से उसकी हालत बिगड़ गई और वह कोमा में चली गई थी। वह लगातार 47 दिनों तक कोमा में थी और इस दौरान भी डॉक्टरों व स्टाफ ने लापरवाही बरती। आखिरकार 2007 में उसकी बेटी की मौत हो गई।
जिला उपभोक्ता फोरम ने सिंह की शिकायत पर उसे एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश अपोलो अस्पताल को 2012 में दिया था लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं था। उसने अधिक मुआवजे के लिए राज्य उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की थी।
आयोग ने फोरम द्वारा दिए गए मुआवजे को बेहद कम बताया और मृतका की आयु, उसके परिवार द्वारा झेली गई पीड़ा व मानसिक वेदना के मद्देनजर मुआवजे की राशि बढ़ाने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि मृतका 24 साल की युवती थी और उसके सामने उसकी पूरी जिंदगी थी। केवल अस्पताल की लापरवाही के कारण उसकी मौत हुई थी।