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अपोलो अस्पताल ने पाकिस्तान से आई अफगानी बच्ची को जीवन दान दिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 14 Aug 2018 10:45 PM IST
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अफगानी बच्ची
- फोटो : अमर उजाला
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अपोलो अस्पताल ने पाकिस्तान के रास्ते आई मासूम को जीवनदान देकर मानवता का रिश्ता कायम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अस्पताल के विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से आई अफगानी बच्ची का लिवर प्रत्यारोपण कर नया जीवन दिया।
ये तीन साल की मासूम हादिया लिवर सिरहोसिस नामक बीमारी से ग्रस्त थी। इसका लिवर फेल हो चुका था। जब हादिया इलाज के लिए लाहौर पहुंची तो डॉक्टरों को उसकी हालत के बारे में पता चला।
चूंकि हादिया के पिता मजदूर हैं, इसलिए पाकिस्तान के डॉक्टरों ने इलाज की रकम दान में एकत्रित कर अपोलो अस्पताल से संपर्क किया।
अपोलो अस्पताल के बाल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित चिल्ड्रेन अस्पताल में बाल हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. हूमा चीमा ने कुछ समय पहले फोन पर बच्ची की तबीयत के बारे में जानकारी दी थी।
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अस्पताल ने रियायती दरों पर ऑपरेशन करने की मंजूरी भी दी। इसके बाद हादिया अपने पिता के साथ दिल्ली पहुंची। डॉ. सिब्बल ने बताया कि हमने तुरंत उसकी जांच की क्योंकि हादिया का प्रत्यारोपण जल्द करना था। जब लिवर फेलियोर अपनी अंतिम अवस्था में पहुंच जाता है, तो हमारे पास सिर्फ प्रत्यारोपण ही विकल्प बचता है।
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ये तीन साल की मासूम हादिया लिवर सिरहोसिस नामक बीमारी से ग्रस्त थी। इसका लिवर फेल हो चुका था। जब हादिया इलाज के लिए लाहौर पहुंची तो डॉक्टरों को उसकी हालत के बारे में पता चला।
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चूंकि हादिया के पिता मजदूर हैं, इसलिए पाकिस्तान के डॉक्टरों ने इलाज की रकम दान में एकत्रित कर अपोलो अस्पताल से संपर्क किया।
अपोलो अस्पताल के बाल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित चिल्ड्रेन अस्पताल में बाल हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. हूमा चीमा ने कुछ समय पहले फोन पर बच्ची की तबीयत के बारे में जानकारी दी थी।
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अस्पताल ने रियायती दरों पर ऑपरेशन करने की मंजूरी भी दी। इसके बाद हादिया अपने पिता के साथ दिल्ली पहुंची। डॉ. सिब्बल ने बताया कि हमने तुरंत उसकी जांच की क्योंकि हादिया का प्रत्यारोपण जल्द करना था। जब लिवर फेलियोर अपनी अंतिम अवस्था में पहुंच जाता है, तो हमारे पास सिर्फ प्रत्यारोपण ही विकल्प बचता है।
उन्होंने बताया कि हादिया अफगानिस्तान से आई तीसरी बच्ची है, जिसका लिवर प्रत्यारोपण उनके यहां हुआ है। डॉ. सिब्बल ने ये भी बताया कि वर्ष 1998 में भारत में पहला सफल लिवर प्रत्यारोपण करने के बाद उनके यहां अब तक 3100 सफल प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इनमें से 297 बच्चे भी शामिल हैं।
बच्ची के लिए आगे आए डॉक्टर
काम के सिलसिले में अमेरिका के सेंट फ्रांसिको गईं पाकिस्तान की डॉ. हूमा चीमा ने फोन पर बताया कि हादिया जब उनके पास पहुंची तब वह कॉन्ट्रेक्टेड क्रोनिक लिवर रोग से पीड़ित थी। इस स्थिति में लिवर प्रत्यारोपण ही एक विकल्प था।
इसलिए हादिया को दिल्ली अपोलो भेजा। आर्थिक रुप से कमजोर पिता से बातचीत के बाद डॉक्टरों ने इलाज का खर्च खुद उठाने का फैसला लिया।
पिछले माह हुआ ऑपरेशन, अब अस्पताल से घर रवाना
डॉक्टरों ने बताया कि हादिया का लिवर प्रत्यारोपण पिछले माह किया गया था। करीब 12 घंटे तक चली सर्जरी सफल होने के बाद उसे लगातार निगरानी में रखा गया। अभी कुछ मेडिकल जांच रिपोर्ट आना बाकी थी। मंगलवार को पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद हादिया अपने मुल्क अफगानिस्तान के लिए रवाना हुई। डॉक्टरों ने बताया कि हादिया को उनके पिता अहमद फवाद से लिवर लेकर प्रत्यारोपित किया था।
बच्ची के लिए आगे आए डॉक्टर
काम के सिलसिले में अमेरिका के सेंट फ्रांसिको गईं पाकिस्तान की डॉ. हूमा चीमा ने फोन पर बताया कि हादिया जब उनके पास पहुंची तब वह कॉन्ट्रेक्टेड क्रोनिक लिवर रोग से पीड़ित थी। इस स्थिति में लिवर प्रत्यारोपण ही एक विकल्प था।
इसलिए हादिया को दिल्ली अपोलो भेजा। आर्थिक रुप से कमजोर पिता से बातचीत के बाद डॉक्टरों ने इलाज का खर्च खुद उठाने का फैसला लिया।
पिछले माह हुआ ऑपरेशन, अब अस्पताल से घर रवाना
डॉक्टरों ने बताया कि हादिया का लिवर प्रत्यारोपण पिछले माह किया गया था। करीब 12 घंटे तक चली सर्जरी सफल होने के बाद उसे लगातार निगरानी में रखा गया। अभी कुछ मेडिकल जांच रिपोर्ट आना बाकी थी। मंगलवार को पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद हादिया अपने मुल्क अफगानिस्तान के लिए रवाना हुई। डॉक्टरों ने बताया कि हादिया को उनके पिता अहमद फवाद से लिवर लेकर प्रत्यारोपित किया था।