घाटी में कश्मीरी पंडितों को विस्थापित करने की फिर उठी मांग, भाजपा नेता ने कही ये बात
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कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी में दोबारा से विस्थापित करने की मांग की है। कश्मीर से बाहर निकाले जाने वाले दिन को याद कर रविवार को जंतर-मंतर पर कश्मीरी पंडित बड़ी संख्या में एकत्र होकर उस दिन को याद कर भावुक हो गए। कश्मीरी पंडितों ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
कश्मीरी समिति के अध्यक्ष सुमीर छरंगू ने संबोधित करते हुए कहा कि 19 जनवरी, 1990 को कश्मीरी पंडितों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर कर दिया गया था। उस वक्त कश्मीर में सरेआम भड़काऊ नारे गूंजा करते थे। उन आवाजों को सुनकर कश्मीरी पंडितों ने दहशत में काफी वक्त गुजारा है।
मौजूदा केंद्र सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर समाज को न्याय दिलाने का काम किया है। हालांकि जम्मू में कैंप में रह रहे कश्मीरियों के लिए अब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस दौरान सभा में संजय कौल, विजय भट्ट, विजय रैना सहित भारी संख्या में युवा उपस्थित रहे।
अनुराग ठाकुर बोले वे सब कुछ खो चुके हैं
इधर, भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी कश्मीरी पंडितों को विस्थापित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापित के लिए यह सही समय है। वे न केवल समय बल्कि जीवन में सब कुछ खो चुके हैं। वे जिस हालात से गुजरे उसके लायक नहीं थे लेकिन अब उन्हें उम्मीद है।
Union Minister Anurag Thakur in Jammu: I think right time has come for Kashmiri Pandits to be back in Kashmir&to get their rights back. It's not only time but they've lost everything in life.They didn't deserve to go through the treatment they've gone through. They have hope now. pic.twitter.com/NtQcvL5atx
— ANI (@ANI) January 19, 2020
बता दें कि घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए 19 जनवरी प्रलय का दिन माना जाता है, क्योंकि वर्ष 1990 में हालात बिगड़ने के कारण इसी तारीख में कश्मीरी पंडित समुदाय ने कश्मीर घाटी से पलायन करना शुरू कर दिया था।
मई 1990 तक करीब पांच लाख कश्मीरी पंडित जान बचाने के लिए अपनी मातृभूमि को छोड़ कश्मीर से पलायन कर चुके थे, जो स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा पलायन माना जाता है। इसी के चलते हर वर्ष 19 जनवरी को जहां कहीं भी कश्मीरी पंडित रहते हैं, वहां वह इस तारीख को ‘होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे’ (प्रलय/बड़ी संख्या में पलायन की तारीख) के तौर पर मनाते हैं।