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Delhi NCR News: रिश्वत लेने के आरोपी पुलिसकर्मी को अग्रिम जमानत देने से इन्कार
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अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक पुलिस अधिकारी से जुड़े भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों में भ्रष्ट आचरण के प्रति बिल्कुल भी सहिष्णुता नहीं होनी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि दंड से मुक्ति न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कम करती है। बता दें कि एक कुख्यात अपराधी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी ने झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 1,00,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में यह राशि 60,000 रुपये पर तय हुई, जिसका आंशिक भुगतान उसी रात कर दिया गया था।
शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे शेष राशि के लिए लगातार परेशान किया जाता रहा, जिसके बाद उसने सतर्कता शाखा से मदद मांगी। अधिकारियों ने नकली नोटों और रिकॉर्डिंग उपकरणों का इस्तेमाल करके जाल बिछाया। कथित तौर पर मैसेजिंग एप के जरिये मिले निर्देशों पर काम करते हुए एक अधिकारी वर्दी में आया और पैसे वसूल लिए। हालांकि, वह पकड़े जाने से पहले ही घटनास्थल से भागने में कामयाब हो गया। बाद में जांचकर्ताओं को कॉल रिकॉर्ड और सुरक्षा फुटेज के जरिये दोनों आरोपियों के बीच तालमेल के सबूत मिले। पैसा कभी बरामद नहीं हुआ और दोनों पकड़े जाने से बच निकले। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला भ्रष्टाचार का नहीं है और शिकायत दर्ज करने में प्रक्रिया गत देरी का हवाला दिया। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक पुलिस अधिकारी से जुड़े भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों में भ्रष्ट आचरण के प्रति बिल्कुल भी सहिष्णुता नहीं होनी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि दंड से मुक्ति न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कम करती है। बता दें कि एक कुख्यात अपराधी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी ने झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 1,00,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में यह राशि 60,000 रुपये पर तय हुई, जिसका आंशिक भुगतान उसी रात कर दिया गया था।
शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे शेष राशि के लिए लगातार परेशान किया जाता रहा, जिसके बाद उसने सतर्कता शाखा से मदद मांगी। अधिकारियों ने नकली नोटों और रिकॉर्डिंग उपकरणों का इस्तेमाल करके जाल बिछाया। कथित तौर पर मैसेजिंग एप के जरिये मिले निर्देशों पर काम करते हुए एक अधिकारी वर्दी में आया और पैसे वसूल लिए। हालांकि, वह पकड़े जाने से पहले ही घटनास्थल से भागने में कामयाब हो गया। बाद में जांचकर्ताओं को कॉल रिकॉर्ड और सुरक्षा फुटेज के जरिये दोनों आरोपियों के बीच तालमेल के सबूत मिले। पैसा कभी बरामद नहीं हुआ और दोनों पकड़े जाने से बच निकले। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला भ्रष्टाचार का नहीं है और शिकायत दर्ज करने में प्रक्रिया गत देरी का हवाला दिया। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
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