फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   anti sikh riots 1984 sajjan kumar sentence to life imprisonment in delhi high court

1984 सिख दंगों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद, जानिए अदालत ने क्या कहा

Mon, 17 Dec 2018 10:52 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 17 Dec 2018 10:52 AM IST
विज्ञापन
anti sikh riots 1984 sajjan kumar sentence to life imprisonment in delhi high court
सज्जन कुमार - फोटो : ट्विटर

1984 सिख दंगों में दिल्ली छावनी के राजनगर पालम इलाके में एक नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या से जुड़े मामले में अदालती फैसले के खिलाफ सात अपीलों पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया था। 

विज्ञापन


साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य दो दोषियों की सजा 3 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी है। सज्जन कुमार के अलावा अदालत ने कैप्टन भागमल, पूर्व पार्षद बलवान यादव और गिरधारी लाल को भी उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहाः
सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि "1947 की गर्मियों में विभाजन के दौरान बहुत सारे लोगों का कत्लेआम किया गया था। उसके ठीक 37 साल बाद दिल्ली फिर वैसी ही त्रासदी का गवाह बनी। आरोपी को राजनीतिक लाभ मिला और वह ट्रायल से बचता रहा।"
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यह एक असाधारण केस था जिसमें सज्जन कुमार के खिलाफ सामान्य परिस्थितियों में कार्यवाही करना बहुत मुश्किल था। इसका कारण ये है कि बड़े पैमाने पर सज्जन कुमार के खिलाफ चल रहे मामलों को रिकॉर्ड में न लेकर इन्हें दबाए जाने का प्रयास किया जाता रहा।

अदालत ने आगे कहा कि, जो केस रजिस्टर भी थे उनकी जांच ठीक से नहीं हुई और जिन मामलों में जांच आगे भी बढ़ती तो उन्हें भी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचने दिया गया। यहां तक कि बचाव पक्ष भी इस बात से इंकार नहीं करेगा कि जहां तक एफआईआर की बात है क्लोजर रिपोर्ट तैयार कर ली गई थी।

तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद अविश्वसनीय रूप से 2700 सिखों का कत्लेआम सिर्फ दिल्ली में कर दिया गया। न्याय व्यवस्था निश्चित रूप से धराशायी हुई जिसके बाद लोगों ने कानून अपने हाथ में ले लिया। इसकी टीस आज भी महसूस की जाती है।

अदालत ने कहा कि, 1984 में 1 से 4 नवंबर तक दिल्ली और पूरे देश में सिखों का नरसंहार हुआ जो राजनीतिक अभिनेताओं द्वारा रचा गया था और कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग से हुआ, ये अपने आप में ''मानवता के खिलाफ अपराध" है।

इसके बाद अदालत ने कहा कि, सज्जन कुमार अभी से जब तक आत्मसमर्पण नहीं कर देते दिल्ली नहीं छोड़ सकते और उन्हें तुरंत सीबीआई को अपना पता और फोन नंबर देना होगा ताकि उनसे संपर्क किया जा सके।

फैसले पर आ रही हैं ये प्रतिक्रियाएं

जेटली बोलेः
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिलने पर कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है। यह हम जैसे उन सबके लिए सबसे भयावह नरसंहार है जो उसके गवाह रहे हैं। उस समय की कांग्रेस सरकारें लगातार इसे ढंकने का काम करती रहीं।

उन्होंने कहा कि अब वह सारे प्रयास परास्त हो चुके हैं। सज्जन कुमार सिख विरोधी दंगों के सिंबल हैं। 1984 के सिख दंगों की विरासत कांग्रेस और गांधी परिवार की गर्दन के चारों ओर लटकी है।

वित्त मंत्री ने आगे कहा, ये विडंबना है कि ये आया उस दिन है कि जबक सिख समाज जिस दूसरे नेता को दोषी मानता है, कांग्रेस उसे मुख्यमंत्री की शपथ दिला रहा है।

इसके साथ ही आप सांसद भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में जब कमलनाथ को पार्टी का इंचार्ज बनाया गया था तो उन्हें वहां से वापस बुला लिया गया था। तब उन्हें वापस क्यों बुलाया गया? कांग्रेस हमारे जख्मों पर नमक रगड़ रही है। लोगों ने उन्हें भीड़ को भड़काते हुए देखा था, उनके खिलाफ कोई एफआईआईआर क्यों नहीं हुई?
अदालत का फैसला आने के बाद शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने अदालत का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'हम न्याय के लिए अदालत को धन्यवाद देते हैं। हमारी जंग जारी रहेगी जब तक जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को मौत की सजा नहीं मिलती और गांधी परिवार कोर्ट तक नहीं पहुंचता और जेल नहीं जाता।'

सज्जन कुमार की सजा के बाद शिरोमणि अकाली दल की नेता और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि मैं पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल की विनती पर 2015 में 1984 के नरसंहार पर जांच करने के लिए एक एसआईटी का गठन किया। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। आखिरकार न्याय का पहिया घूम गया।

आज सज्जन कुमार को सजा हुई है कल जगदीश टाइटलर को सजा होगी और फिर कमलनाथ को फिर आखिरकार गांधी परिवार को भी सजा होगी।

हरसिमरत कौर ने आगे कहा कि खून का बदला खून, जब एक बड़ा दरख्त गिरता है तो धरती हिलती ही है। जब एक मुख्यमंत्री ऐसे शब्द टेलीविजन पर कहता है...तब हम अपने आपको बचाने की कोशिश कर रहे थे और भगवान ने हमें बचा लिया। हजारों मासूम लोग बेरहमी से अपने परिवार के सामने मार दिए गए।

कौर ने आगे कहा कि, कांग्रेस नेता और पीएम के करीबी सिखों के घरों तक पुलिस के साथ गए। यहां तक कि आज भी जब मैं वो सब सोचती हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बच्चों बिलख रहे थे, वह एक शब्द नहीं बोल पा रहे थे। मुझे आज भी वो सब याद है।

अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा, जैसे क्रिश्चियन मिशेल के केस में हुआ कि कांग्रेस के वकील उसकी पैरवी कर रहे थे। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ लोग तभी किसी मामले में पड़ते हैं जब गांधी परिवार का कोई हित उससे जुड़ा होता है। कपिल सिब्बल का बेटा अमित सिब्बल सज्जन कुमार का प्रमुख वकील है।

संबित पात्रा बोले
वहीं बीजेपी नेता संबित पात्रा ने इस मामले में कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। कमलनाथ जी का नाम नानावती कमीशन की रिपोर्ट में गवाह के रूप में और एक एफिडेविट में भी है। सिख विरोधी दंगों में शामिल एक शख्स को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। राहुल गांधी को कमलनाथ को पार्टी से निकाल देना चाहिए।

आप नेता जर्नेल सिंह 
आप नेता जर्नेल सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 1984 सिख दंगे में आरोपी सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद कहा कि हमें पता चला है कि कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद इस फैसले को उच्च न्यायलय में चुनौती देने वाले हैं। उन्होंने खुर्शीद के इस फैसले को बेहद ही शर्मनाक बताया और कहा कि सज्जन कुमार को पार्टी से बाहर करने की बजाए वह कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की बात कर रहे हैं। 

क्या है मामला

इस मामले में दोषियों ने अपनी सजा और सीबीआई ने इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। दंगा पीड़ित जगदीश कौर ने भी सज्जन कुमार की रिहाई को चुनौती दे रखी थी।

न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर व न्यायमूर्ति विनोद गोयल ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 29 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था तथा पूर्व पार्षद बलवान खोखर, कैप्टन भागमल व गिरधारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

 वहीं, पूर्व विधायक महेंद्र यादव व किशन खोखर को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। दोषियों ने मई 2013 में अदालती फैसले को चुनौती दी थी। 

पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सिख दंगा मामलों की सुनवाई करते हुए 29 मार्च 2017 को पहले बंद हो चुके पांच मामलों में बलवान खोखर व महेंद्र यादव समेत 11 लोगों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने इनसे पूछा था कि क्यों न इन मामलों में दोबारा जांच व सुनवाई करवाई जाए, क्योंकि उन पर बेहद गंभीर आरोप हैं।

सीबीआई की ओर से अपील पर जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने कहा था कि जस्टिस आरएन मिश्रा जांच आयोग के समक्ष सज्जन कुमार के खिलाफ 17 हलफनामे दिए गए थे लेकिन उन पर एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था।

एनडीए सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए जस्टिस नानावटी जांच आयोग बनाया था। इस आयोग ने दिल्ली छावनी व पुल बंगश इलाकों में हुई हत्याओं की जांच दोबारा कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच के बाद इन मामलों में वर्ष 2010 में कड़कड़डूमा जिला अदालत में दो आरोप पत्र दाखिल किए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed