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Delhi NCR News: इंसान के भीतर छिपे ‘जहर’ को उजागर करता भावनात्मक नाटक
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- एलटीजी ऑडिटोरियम में मंचित प्रस्तुति ने जीवन, संवेदना और उम्मीद का दिया संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंसान के भीतर पनप रही कड़वाहट, निराशा और संवेदनहीनता को प्रभावशाली तरीके से उजागर करने वाला नाटक ‘जहर’ रविवार को एलटीजी ऑडिटोरियम में मंचित किया गया। लेखक पंकज सोनी की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर गहराई से प्रभावित किया। नाटक ने यह संदेश दिया कि असली जहर कोई रासायनिक पदार्थ नहीं, बल्कि इंसान के भीतर जमा नकारात्मकता और टूटन है, जो धीरे-धीरे जीवन को खत्म कर देती है। नाटक की कहानी एक साधारण मेडिकल स्टोर के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें एक 65 वर्षीय कैमिस्ट और जीवन से निराश एक व्यक्ति के बीच संवाद दिखाया गया है। परेशान व्यक्ति अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए जहर मांगता है, लेकिन कैमिस्ट उसे रोकने के बजाय बातचीत के जरिए उसकी मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश करता है। वह जीवन को सही नजरिये से देखने की सीख देता है और समझाता है कि दुख से बाहर निकलने का रास्ता उम्मीद और संवेदना में छिपा है। संवादों के दौरान निराश व्यक्ति का नजरिया बदलने लगता है और वह जीवन की अहमियत को समझता है। भावनात्मक प्रस्तुति, गहरे संवाद और संवेदनशील अभिनय ने दर्शकों को लंबे समय तक सोचने पर मजबूर कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंसान के भीतर पनप रही कड़वाहट, निराशा और संवेदनहीनता को प्रभावशाली तरीके से उजागर करने वाला नाटक ‘जहर’ रविवार को एलटीजी ऑडिटोरियम में मंचित किया गया। लेखक पंकज सोनी की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर गहराई से प्रभावित किया। नाटक ने यह संदेश दिया कि असली जहर कोई रासायनिक पदार्थ नहीं, बल्कि इंसान के भीतर जमा नकारात्मकता और टूटन है, जो धीरे-धीरे जीवन को खत्म कर देती है। नाटक की कहानी एक साधारण मेडिकल स्टोर के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें एक 65 वर्षीय कैमिस्ट और जीवन से निराश एक व्यक्ति के बीच संवाद दिखाया गया है। परेशान व्यक्ति अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए जहर मांगता है, लेकिन कैमिस्ट उसे रोकने के बजाय बातचीत के जरिए उसकी मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश करता है। वह जीवन को सही नजरिये से देखने की सीख देता है और समझाता है कि दुख से बाहर निकलने का रास्ता उम्मीद और संवेदना में छिपा है। संवादों के दौरान निराश व्यक्ति का नजरिया बदलने लगता है और वह जीवन की अहमियत को समझता है। भावनात्मक प्रस्तुति, गहरे संवाद और संवेदनशील अभिनय ने दर्शकों को लंबे समय तक सोचने पर मजबूर कर दिया।