अगर अमूल दूध पीते हैं तो पढ़ें ये खबर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्वसनीय माने जाने वाले अमूल दूध में मिलावट पाई गई है। लखनऊ और फिर कोलकाता की लैब में नोएडा से भेजे गए फुल क्रीम दूध के नमूनों में डिटरजेंट की मिलावट पाई गई है।
यही नहीं, वसा और सॉलिड नॉट फैट (एसएनएफ) मानक से कम मिला है। यह हालत तब है, जब सुप्रीम कोर्ट ने भी दूध में मिलावट को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
गौतमबुद्ध नगर खाद्य निरीक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक फूड इंस्पेक्टर और टीम ने 15 जुलाई 2013 को सेक्टर 11 स्थित मोर फॉर यूज स्टोर से अमूल फुल क्रीम दूध के नमूने लिए थे।
दूध में पाया गया डिटरजेंट
नोएडा के सेक्टर-11 के एक स्टोर से अमूल दूध के नमूने लेने के बाद लखनऊ स्थित लैब में जांच के लिए भेजे गए। फूड इंस्पेक्टर एसएन सिंह ने बताया कि लैब में जांच में वसा और अन्य जरूरी तत्व मानक से कम मात्रा में पाए गए।
कंपनी की ओर से इसके खिलाफ जिला खाद्य निरीक्षण विभाग में अपील की गई और नमूने को जांच के लिए कोलकाता की सीएफएल लैब में भेजने का आग्रह किया गया।
वहां की लैब से आई रिपोर्ट में भी वसा और अन्य जरूरी तत्व मानक से कम मात्रा में पाए गए। इसके अलावा डिटरजेंट की भी उपस्थिति पाई गई। विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। कोर्ट में जाने की तैयारी है।
क्या है एसएनएफ?
दूध के दो हिस्से होते हैं। पहला वसा और दूसरा सॉलिड नॉट फैट (एसएनएफ)। एसएनएफ में विटामिंस, मिनरल्स, प्रोटीन और लैक्टोस शामिल हैं। एसएनएफ दूध का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कितना होना चाहिए वसा और एसएनएफ
दूध-------वसा----एसएनएफ
फुल क्रीम---6%------9%
टोंड---------3%------8.50%
डबल टोंड---1.5%----9%
सजा का क्या है प्रावधान
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत गंभीर हालत या मृत्यु होने पर सात साल की सजा से लेकर अजीवन कारावास और दस लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
मौलाना आजाद, कम्यूनिटी मेडिसिन के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि बच्चों के लिए दूध जरूरी है। ऐसे में डिटरजेंट की मिलावट किडनी और अन्य अंगों के लिए खतरनाक है। बच्चा यदि पूरी तरह से दूध पर ही निर्भर है। मिलावट है तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है।
वहीं फूड इंस्पेक्टर एसएन सिंह ने कहा कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान जारी है। विगत माह में 15 पत्रावलियों पर मुकदमे दाखिल किए गए थे। नियमित रूप से निरीक्षण कर नमूनों का संकलन किया जा रहा है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।