अमर उजाला की ‘पुलिस की पाठशाला’: खुद न बनें, मोबाइल को बनाएं अपना गुलाम; बच्चों को दिए साइबर सुरक्षा के टिप्स
डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि बच्चों को मोबाइल का गुलाम बनने के बजाय मोबाइल को अपना गुलाम बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। मोबाइल फोन का पासवर्ड हमेशा मजबूत रखना चाहिए, ताकि साइबर बुलिंग और डेटा चोरी जैसी घटनाओं से बचा जा सके।
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न्यू अशोक नगर स्थित एसएन मॉडर्न स्कूल में शुक्रवार को आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ कार्यक्रम में बच्चों को साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और गुड टच-बैड टच के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार ने बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी।
डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि बच्चों को मोबाइल का गुलाम बनने के बजाय मोबाइल को अपना गुलाम बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। मोबाइल फोन का पासवर्ड हमेशा मजबूत रखना चाहिए, ताकि साइबर बुलिंग और डेटा चोरी जैसी घटनाओं से बचा जा सके।
कार्यक्रम में पूर्वी दिल्ली जिला साइबर सेल के एसआई नरेश कुमार ने बच्चों को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि एपीके फाइल डाउनलोड करने से बचना चाहिए, क्योंकि हैकर अक्सर इसी माध्यम से मोबाइल का डेटा चुरा लेते हैं। उन्होंने बच्चों को बताया कि यदि कोई साइबर ठगी या ऑनलाइन अपराध का शिकार होता है, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें या साइबर क्राइम की आधिकारिक वेबसाइट cybercrime. gov. inपर जानकारी दें।
इस दौरान डीसीपी राजीव कुमार ने बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को सलाह दी कि बच्चों को पोस्टर और चित्रों के माध्यम से इस विषय को समझाया जाए। उन्होंने बच्चों से कहा कि कोई गलत घटना होती है तो माता-पिता और पुलिस को बताएं। कार्यक्रम में स्कूल के चेयरमैन दीपक अग्रवाल, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य आदेश शर्मा मौजूद रहे।
बच्चों के सवालों का पुलिस अफसरों ने दिया जवाब
गुड टच और बैड टच की पहचान कैसे करें?
पुलिस ने स्कूल को सलाह दी कि बच्चों को पोस्टर और चित्रों के माध्यम से इसके बारे में समझाया जाए, ताकि वे आसानी से सही और गलत स्पर्श पहचान सकें।
अकेले सफर करते समय खुद को कैसे बचाएं?
सफर के दौरान अज्ञात लोगों से बातचीत नहीं करनी चाहिए। किसी परेशानी में फंसने पर तुरंत 112 नंबर पर कॉल करें।
ऑनलाइन बुलिंग से कैसे बचें?
अपनी निजी जानकारी गुप्त रखें और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें।
फेक कॉल और फेक ऑनलाइन मैसेज से कैसे बचें?
संचार साथी एप का उपयोग करें। यह एप फेक कॉल और फर्जी मैसेज की पहचान करने में मदद करता है।
बच्चे समाज को बेहतर बनाने में किस तरह योगदान दे सकते हैं?
नशीले पदार्थों से दूर रहकर और साइबर अपराध के प्रति जागरूकता फैलाकर बच्चे समाज को बेहतर बना
सकते हैं।