कमीशन के खेल में डॉक्टर नहीं लिख रहे जेनेरिक दवा, 40 प्रतिशत सस्ता हो सकता है इलाज
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ब्रांडेड दवाओं के नाम पर इलाज के लिए मरीजों को चार गुना ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। 16 से 20 रुपये में मिलने वाली जेनेरिक दवा की जगह ब्रांडेड कंपनी की दवा 100 से 120 रुपये में मिल रही है।
दरअसल, कई डॉक्टर कमीशन के खेल में जेनेरिक दवा नहीं लिख रहे हैं। अगर कोई मरीज जेनेरिक दवा लेने के बार में पूछता भी है तो डॉक्टर सीधे मना कर देते हैं।
जेनेरिक दवा और ब्रांडेड दवाइयों में एक ही तरह का सॉल्ट इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ब्रांडेड दवा की मार्केटिंग पर कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, इसलिए कंपनियां इनको महंगा बेचती हैं।
अगर डॉक्टर जेनेरिक दवा लिखे तो मरीज की जेब पर 40 से 50 प्रतिशत बोझ कम हो जाएगा, लेकिन मोटी कमीशन के चक्कर में डॉक्टर चुनिंदा कंपनियों की ही दवा लिखते हैं।
हर अस्पताल में डॉक्टरों के पास दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव आते हैं। ये लोग डॉक्टर को उनकी कंपनी की ही दवा लिखने के लिए कमीशन देते हैं। ऐसे में डॉक्टर उन्हीं की दवा लिखता है। इसका सीधा बोझ मरीज की जेब पर पड़ता है।
3 साल में भी नहीं बदले हालत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 में देशभर में एक हजार से अधिक जनऔषधि केंद्र खोलने की बात कही थी। उसी के तहत अभी जिले में कई जेनेरिक दवा के मेडिकल स्टोर शुरू हुए हैं।
नोएडा शहर में गंगा शॉपिंग कांप्लेक्स, सदरपुर में जेनेरिक दवा का मेडिकल स्टोर खुला है। इन स्टोर को खुले हुए करीब 2 साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक हालत नहीं बदले हैं। दिन में 10 से 12 ही लोग ही जेनेरिक दवा लेने पहुंच रहे हैं। इससे दुकान का किराया निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
डॉक्टर वापस भिजवा रहे हैं जेनेरिक दवाइयां
सदरपुर में जेनेरिक मेडिकल स्टोर संचालक हेमंत शर्मा ने बताया कि हमारे पास अधिकतर सॉल्ट की दवाइयां मिलती हैं। बुखार, ब्लड प्रेशर, शुगर समेत कई बीमारियों की दवाइयां मिल रही हैं। हमारे पास कैल्शियम की दवा 16 रुपये में मिल रही है जबकि ब्रांडेड कंपनियां इसे 100 से 120 रुपये में बेच रही हैं। वहीं, आयरन की दवा 18 रुपये मिल रही है जबकि ब्रांडेड दवा कंपनियां इसे 105 रुपये में बेच रही हैं। दूसरे मेडिकल स्टोर की तुलना में इनके रेट बहुत कम हैं। लेकिन कोई डॉक्टर जेनेरिक दवा नहीं लिखता है। अगर कोई मरीज जेनेरिक दवा लेकर जाते हैं तो उसको वापस भिजवा देते हैं।
जिले में हर दिन 3 करोड़ की दवाइयों का कारोबार
केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि जेनेरिक दवाइयां सस्ती होती हैं। जागरूकता की कमी से लोग बहुत कम खरीद रहे हैं। इससे दुकान का खर्चा नहीं निकल पाता है। इस वजह से भी और जेनेरिक दवा के मेडिकल स्टोर नहीं खुल रहे हैं। डॉक्टरों को जेनेरिक दवा लिखनी चाहिए। जिले में हर दिन 3 करोड़ की दवाइयों की खपत होती है। उसमें जेनेरिक दवाइयों का हिस्सा बहुत कम है।
मरीजों को भी जागरूक होना पड़ेगा। डॉक्टर के लिखे पर्चे को ले जाकर जेनेरिक दवा स्टोर पर दिखाकर दवा ले सकते हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें आईएमएस के डॉक्टर से मिलेगी और जेनेरिक दवा लिखने की अपील करेगी, ताकि मरीज की जेब पर भार कम पड़े। जेनेरिक दवा बहुत सस्ती होती है।- डॉक्टर अनुराग भार्गव, सीएमओ