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अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स: बिना संकोच छोड़े आगे नहीं बढ़ पाएंगी लड़कियां

Fri, 12 Jul 2019 12:25 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 12 Jul 2019 12:25 PM IST
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Amar Ujala Aparajita 100 million smiles Shyam Singh Smarak Kanya Inter College girls awareness
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में शामिल हुईं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
नोएडा अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत बृहस्पतिवार को सेक्टर-73 स्थित श्याम सिंह स्मारक कन्या इंटर कॉलेज में छात्राओं को खेल के प्रति जागरूक  किया गया। क्रीड़ा अध्यापक महावीर सिंह ने कहा कि अब खेल में भी बेहतर भविष्य है। 
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बस अपने अंदर छिपी प्रतिभा को निखारना है। आज खेलों में छात्राएं देश का नाम रोशन कर रही हैं और काफी हद तक ग्रामीण क्षेत्र से ही छात्राएं आगे हैं। शारीरिक श्रम से दिमाग और शरीर दोनों चुस्त होते हैं। अगर दिन में दो घंटे खेल को दिए जाएं तो बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि छात्राओं को पढ़ाई और खेल के लिए समय का प्रबंधन करना होगा। जिले की रेसलर बबीता नागर और तैराक आलिया ने भी खेल में नाम कमाया है। जनपद कई ऐसी प्रतिभाएं हैं जो सामान्य परिवार और ग्रामीण परिवेश होने के बाद भी मुकाम हासिल किया है। स्कूल की प्रधानाचार्या गीता शर्मा ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षकों को भी खेल के प्रति छात्राओं को प्रेरित करना चाहिए। 
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ग्रामीण परिवेश की छात्राओं में संकोच होता है। इसे दूर करना स्कूल-कॉलेजों का काम है, जिससे छात्राएं प्रतिभा को दिखा सकें। अगर छात्राओं को संकोच है तो वह स्वयं भी शिक्षिकाओं से मिलकर दूर कर सकती है। जब तक संकोच दूर नहीं होगा तब तक छात्राएं आगे नहीं बढ़ पाएंगी।

अपराजिता अभियान के तहत खेल को लेकर जागरूकता शिविर में काफी अच्छी जानकारी मिली है। इस तरह कॉलेज में शिविर होते रहने चाहिए। इसके छात्राएं प्रेरित होंगी। - ज्योति, छात्रा

मेरा विचार था कि खेल से कभी भविष्य नहीं बन सकता, लेकिन जागरूकता शिविर में खेल शिक्षक ने अच्छी जानकारी दी। अब मैं खेल में भी बेहतर करने का प्रयास करूंगी। - सिया, छात्रा

मेरे अभिभावक कहते हैं कि खेल से भविष्य नहीं बनाया जा सकता है, मगर जिन लोगों ने खेल में भविष्य बनाया है उनका उदाहरण देकर परिजनों को समझा सकूंगी। - बबीता, छात्रा

अभी तक मैं खेलों के प्रति रुचि नहीं लेती थी लेकिन जागरूकता शिविर में काफी जानकारी मिली है। अब खेल के प्रति मेरा रुझान बढ़ा है। - खुशी, छात्रा
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