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सीमापुरी हिंसा के सभी 12 आरोपियों को जमानत, आईओ के समक्ष 19 को पेश होने की रखी शर्त
Fri, 10 Jan 2020 11:04 PM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Fri, 10 Jan 2020 11:04 PM IST
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कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार मल्होत्रा ने सीमापुरी इलाके में सीएए के खिलाफ हिंसा में गिरफ्तार सभी 12 आरोपियों को 20-20 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। मामले की जांच कर रहे आईओ के समक्ष उन्हें 19 जनवरी को पेश होना होगा, जहां वे हिंसा मामले से जुड़े मामले में अपनी सफाई देंगे।
अदालत के समक्ष बचाव पक्ष के वकील अब्दुल गफ्फार, सरफराज आसिफ, जाकिर रजा ने कहा कि इनमें से दो को छोड़कर सभी 21 दिसंबर, 2019 से न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने दावा किया कि हिंसा के समय इनमें से अधिकांश आरोपी घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे।
वकीलों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जता रहे थे। साथ ही पुलिस ने घटना के पांच घंटे बाद एफआईआर दर्ज की। इन पर आईपीसी की धारा 307 भी लगाई गई, जबकि किसी पुलिसकर्मी को गंभीर चोट नहीं लगी थी। वकीलों ने आवेदक हाजी मेहराज के विषय में सीसीटीवी फुटेज पेश कर दावा किया कि वे शाम 4 बजे तक अपने आवास पर थे।
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न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन विरोध के दौरान सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को भंग करने का हक किसी को नहीं है। न्यायाधीश ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद आईओ से कुछ सवाल पूछे और जमानत स्वीकार कर ली।
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अदालत के समक्ष बचाव पक्ष के वकील अब्दुल गफ्फार, सरफराज आसिफ, जाकिर रजा ने कहा कि इनमें से दो को छोड़कर सभी 21 दिसंबर, 2019 से न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने दावा किया कि हिंसा के समय इनमें से अधिकांश आरोपी घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे।
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वकीलों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जता रहे थे। साथ ही पुलिस ने घटना के पांच घंटे बाद एफआईआर दर्ज की। इन पर आईपीसी की धारा 307 भी लगाई गई, जबकि किसी पुलिसकर्मी को गंभीर चोट नहीं लगी थी। वकीलों ने आवेदक हाजी मेहराज के विषय में सीसीटीवी फुटेज पेश कर दावा किया कि वे शाम 4 बजे तक अपने आवास पर थे।
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न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन विरोध के दौरान सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को भंग करने का हक किसी को नहीं है। न्यायाधीश ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद आईओ से कुछ सवाल पूछे और जमानत स्वीकार कर ली।