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लिंचिंग: लौटने का इंतजार कर रहे थे बच्चे, मौत की खबर से मचा कोहराम

Sun, 22 Jul 2018 04:01 AM IST
यूनुस अलवी/राजुद्दीन जंग, अमर उजाला, नूंह/फिरोजपुर झिरका
यूनुस अलवी/राजुद्दीन जंग, अमर उजाला, नूंह/फिरोजपुर झिरका Updated Sun, 22 Jul 2018 04:01 AM IST
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Akbar lynched by mob on suspicion of cow smuggling
Akbar Lynched

फिरोजपुर झिरका के कोलगांव निवासी 28 वर्षीय अकबर के बच्चे घर में दुधारू गाय आने का इंतजार कर रहे  थे, जब इस घटना के बारे में पता चला तो परिवार में कोहराम मच गया। अकबर की पत्नी ने सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है और हत्यारों को फांसी दिए जाने की मांग की। उसका कहना था कि जब तक ऐसे लोगों को फांसी नहीं होगी बेकसूरों की जान जाती रहेगी। 

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परिजनों के अनुसार अकबर मजदूरी और गाय का दूध बेचकर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहा था। उसके सात बच्चे हैं और सभी नाबालिग हैं। सबसे बड़ी बेटी साहिला 14 साल की है और सबसे छोटी बेटी 2 साल की है। उसकी हत्या की  सूचना मिलने के बाद से ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। बच्चों और उसकी पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। 
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अकबर की पत्नी असमीना अकबर-अकबर पुकारते विलाप करने लगी। इंसाफ की दुहाई लगाती वह रोत हुए कह रही थी कि ‘कहां चला गया मुझे अकेली छोडक़र’। ‘इन मासूम बच्चों का क्या होगा, मैं कैसे जी पाऊंगी’। यह माहौल देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भर आईं और असमीना को ढांढस बंधाते हुए हरसंभव मदद देने व इंसाफ दिलाने की बातें कहते रहे।

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दिन में गायें छीन लेतें हैं इसलिए रात में निकले थे

Akbar lynched by mob on suspicion of cow smuggling
Akbar Lynched
असमीना ने रूंधे गले से  कहा कि बड़ी लड़की 14 साल की है , अगर बड़ा लड़का होता तो वो कमाने तो लग जाता। अब कैसे गुजर-बसर होगा, इतना कह वह बेहोश हो जाती है। आखिर परिजनों ने शव को दफनाने की सहमति दी। परिजनों व असमीना ने अमर उजाला को बताया कि अकबर कोई ऐसा काम नहीं करता था जो गलत हो, वो तो बच्चों के लिए दुधारू गाय लाने गया था। दिन में गाय इसलिए नहीं लाते क्योंकि वहां के लोग गायों को छींन लेते है और मारते-पीटते हैं। इसलिए वह वहां से रात में गाय लेकर चला था। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। 

दिन में गायें छीन लेतें हैं इसलिए रात में निकले थे
कथित गोरक्षकों के हमले में जान बचाकर निकले असलम खान ने बताया कि वह अकबर के साथ गाय खरीदने के लिए 19 जुुलाई को अलवर के गांव खानपुर गया था। वहां पर अकबर का कोई मिलने वाला है उससे 60 हजार में गाय का सौदार किया था। गाय के एक बछड़ा भी था। उन्होंने दिन में गाय को घर लाने के लिए कई वाहन चालकों से बात की लेकिन कोई भी तैयार नहीं हुआ। ऐसे में उन्होंने तय किया कि रात के समय वे गाय-बछड़े को ले जाएंगे, क्योंकि दिन में उन्हें  गाय  छीनने का डर था।

 

क्या कहते हैं ग्रामीण

Akbar lynched by mob on suspicion of cow smuggling
Akbar Lynched

शुक्रवार रात वे खानपुर गांव से कोलगांव के लिए चल दिए। अकबर ने गाय के गले में बंधी रस्सी पकड़ रखी थी और वह पीछे-पीछे चल रहा था। रात करीब एक बजे जब वह सरदारों के गांव लालवंडी के पास से गुजर रहे थे तो मोटरसाइकल पर सवार दो-तीन लोगों ने हवा में फायर की। फायर की आवाज सुनते ही वह पेडों की ओट में हो गया। अकबर गाय को छोड़कर भागने लगा। हथियार बंद लोग भी उसके पीछे भागने लगे। कुछ दूर से उसे आवाज सुनाई दे रही थी कि वह अकबर को बुरी तरह मार रहे हैं। वह किसी तरह जान बचाकर वहां से निकल लिया।

क्या कहते हैं ग्रामीण
कोलगांव निवासी हाजी अख्तर, जाकिर नंबरदार, खलील, सफी मोहम्मद का कहना है कि आखिर कब तक इन गुंडागर्दी चलती रहेगी। कथित गोरक्षक न जाने कितने बच्चों को यतीम और महिलाओं को विधवा बना चुके हैं। उनका कहना है कि अकबर दूध बेचकर और मजदूरी कर अपने सात बच्चों को पाल रहा था। अब उसके बच्चे लावारिस हो गए  हैं। सरकार को चाहिए की गरीब परिवार की हरसंभव मदद करे।

पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे मामन खां

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पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे मामन खां
मामन खां इंजीनियर मृतक अकबर के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने भाजपा सरकार हमला करते हुए कहा कि जब से देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है तब से कथित गोरक्षकों की ओर से जघन्य वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री और सूबों के मुख्यमंत्री ऐसे मामलों में चुप रहते हैं। इससे साफ जाहिर है की ये सब सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंन राजस्थान और हरियाणा सरकार से पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
 

शव गांव पहुंचा, एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात

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शव गांव पहुंचा, एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात
फिरोजपुरझिरका। कथित गोरक्षकों के हमले का शिकार हुए अकबर का शव अलवर के जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शनिवार शाम कोलगांव पहुंचा। एहतियात के तौर  पर गांव में फिरोजपुर झिरका, नूंह, पिनगवां, पुन्हाना, नगीना सहित कई थानों और सीआईए पुलिस टीम को फिरोजपुर झिरका के डीएसपी की अगुवाई में दिल्ली-अलवर रोड पर कोलगांव को जाने वाली सड़क पर तैनात किया गया। फिरोजपुर झिरका के थाना प्रभारी अशोक कुमार दहिया पुलिस टीम के साथ मृतक परिवार के घर पर उनको सांत्वना देने पहुंचे। वरिष्ठ नेता मामन खान कोलगांव पहुंचकर मृतक के परिजनों के दर्द में शामिल हुए। उन्हें मुट्ठी बांधकर मदद दी और आगे भी हरसंभव मदद देने का आश्वासन
दिया। भाजपा नेता आलम उर्फ मुंडल सहित इलाके के कई नेता परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
 

गोतस्करी के नाम पर अलवर में एक साल में चार की हत्या

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गोतस्करी के नाम पर अलवर में एक साल में चार की हत्या
बीफ के नाम पर उत्तर प्रदेश में अखलाक की मौत के बाद राजस्थान में फर्जी गोरक्षक ज्यादा ही सक्रिय हो गए। पिछले सवा साल में ही गोतस्करी के नाम पर चार लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। अप्रैल 2017 को नूंह खंड के गांव जयसिंहपुर निवासी पहलू को अलवर के बहरोड में उस समय बीच सड़क पर पीट-पीट कर मार डाला था, जब वह जयपुर से गाय खरीद कर घर ला रहा था। अक्तूबर 2017 को अलवर के ही ब्लॉक गोविंदगढ़ में घाटमीका निवासी उमर मोहम्मद की फर्जी गोरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। 
 

सबूत मिटाने के लिए शव को जलाने का भी प्रयास किया

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आरोपियो ने सबूत मिटाने के लिए शव को जलाने का भी प्रयास किया था। वहीं जनवरी 2018 में नूंह खंड के गांव सालाहेडी निवासी तालीम पुत्र शरीफ की अलवर पुलिस ने गोतस्करी के आरोप में एनकांउटर कर दिया  था, और शुक्रवार रात गोतस्करी के नाम पर कोलगांव निवासी अकबर कथित गोरक्षकों का शिकार बना। अलवर मेव पंचायत के प्रवक्ता मोहम्मद कासिम और संरक्षक शेर मोहम्मद का कहना है कि राजस्थान में पुलिस नाकारा हो गई है। राजस्थान के थानों को पुलिस नहीं बल्कि फर्जी गोरक्षक चला रहे हैं। उनका कहना है कि जब गोरक्षक ही सारा काम करेगें तो पुलिस किस काम की है इसलिए थानों से पुलिस को हटाकर गोरक्षकों के हवाले कर दिया जाए।
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