Delhi: एम्स तैयार करेगा रोबोटिक सर्जन, नहीं होगा संक्रमण, सर्जरी कराने के लिए अब नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार
इस सुविधा के बाद एम्स में 100 फीसदी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होने की संभावना है। इसके बाद मरीजों को सर्जरी के बाद एक से दो दिन बाद ही छुट्टी मिल जाएगी, जबकि ओपन सर्जरी करवाने के बाद मरीजों को 14 से 15 दिन तक अस्पताल में रहना होता है।
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एम्स में सर्जरी कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर जल्द ही रोबोटिक सर्जरी कर सकेंगे। एम्स इन सभी डॉक्टरों को रोबोटिक सर्जरी करना सिखाएगा। इसके लिए मंगलवार को अस्पताल में अत्याधुनिक सर्जिकल रोबोटिक्स प्रशिक्षण सुविधा का शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के बाद एम्स में 100 फीसदी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होने की संभावना है। इसके बाद मरीजों को सर्जरी के बाद एक से दो दिन बाद ही छुट्टी मिल जाएगी, जबकि ओपन सर्जरी करवाने के बाद मरीजों को 14 से 15 दिन तक अस्पताल में रहना होता है। खास बात यह है कि रोबोटिक सर्जरी से संक्रमण का खतरा भी नहीं रहेगा।
सर्जरी के लिए बेड खाली होने पर इंतजार कर रहे अन्य मरीजों को भी सुविधा मिल सकेगी। इससे इंतजार का समय भी काफी घट जाएगा। साथ ही सर्जरी के बाद ज्यादा समय तक अस्पताल में रहने से होने वाला इंफेक्शन का खतरा भी कम हो जाएगा। इस बारे में एम्स में अकादमिक डीन डॉ. मीनू बाजपेयी ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी एडवांस विधि है। इसमें बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती। एम्स में अभी हर विभाग में एक-दो रोबोटिक सर्जन हैं। लेकिन रोबोटिक्स प्रशिक्षण शुरू होने से सभी सर्जरी के डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी जाएगी। इससे रोबोटिक सर्जरी की संख्या तो बढ़ सकेगी। साथ ही यहां से सीख कर जाने वाले अन्य अस्पतालों में भी रोबोटिक सर्जरी की उपलब्धता को बढ़ा सकेंगे।
कैरिकुलम में होगा शामिल
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि एम्स रोबोटिक सर्जरी को अपने कैरिकुलम में भी शामिल करेगा। एम्स से पढ़कर जाने वाले डॉक्टर दूसरे अस्पतालों में शिक्षक के तौर पर काम करते हैं। इससे देश के अन्य अस्पतालों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधा का विस्तार होता है। एम्स में शुरू हुई इस सुविधा में सर्जनों को रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी में सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें सिमुलेशन के साथ-साथ वेट लैब प्रशिक्षण भी शामिल है।
अभी हर विभाग में एक-दो रोबोटिक सर्जन
एम्स के विभिन्न विभागों में हर साल डेढ़ से दो लाख के करीब छोटी-बड़ी सर्जरी होती हैं। इनमें रोबोटिक सर्जरी भी शामिल हैं। एम्स में बेड के अभाव में मरीजों को सर्जरी के लिए दो माह से ढाई साल तक वेटिंग का समय दिया जाता है। देश में सबसे पहले रोबोटिक सर्जरी की सुविधा एम्स में शुरू हुई थी और अभी हर विभाग में एक-दो रोबोटिक सर्जन सुविधाएं दे रहे हैं। लेकिन ट्रेनिंग के बाद सभी सर्जन रोबोटिक सर्जरी कर सकेंगे।
रोबोटिक सर्जरी में क्या है खास
डॉक्टर मीनू वाजपेयी ने कहा कि ओपन सर्जरी में बड़ा सा चीरा लगा कर सर्जरी की जाती है। वहीं, लेप्रोस्कोपिक में शरीर के अंग में कुछ छेद बनाकर सर्जरी की जाती है। इन छेद से सर्जरी उपकरण डाले जाते हैं और उनकी मदद से सर्जरी की जाती है। वहीं, रोबोटिक सर्जरी में पूरी प्रक्रिया कृत्रिम बुद्धिमता आधारित रोबोट की मदद से होती है। यह एडवांस विधि हैं जिसमें पूरा कंट्रोल एक कंप्यूटराइज्ड कंसोल पर बैठे सर्जन के हाथ में होता है। इससे शरीर के उस अंग में भी आसानी से सर्जरी की जा सकती हैं जहां तक पहुंच पाना आसान नहीं होता। डॉ. बाजपेयी के अनुसार किसी भी तरह की सर्जरी के बाद लगने वाले चीरे को सूखने में समय लगता है। इस दौरान इंफेक्शन का खतरा रहता है। मरीज को हाई डोज एंटीबायोटिक्स देना पड़ता है। दर्द ज्यादा होता है, ब्लड लॉस ज्यादा होता है। लेकिन जब यही सर्जरी रोबोट से की जाती है तो रिकवरी बहुत फास्ट होती है।
तीन चरण में मिलेगी ट्रेनिंग
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि ट्रेनिंग के तीन स्टेप होंगे। सर्जन को ऑडियो वीडियो के माध्यम से सर्जरी की जानकारी दी जाएगी। उसके बाद उन्हें ऑन टेबल ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इस दौरान देखा जाएगा कि सर्जरी के रेजिडेंट डॉक्टर को रोबोटिक सर्जन बनने में कुल कितना समय लग रहा है और उनमें क्या सुधार आ रहा है।