Delhi: कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से दिल के तार जोड़ेगा एम्स, फोन पर ही मरीजों के लक्षण जानकर मिलेगा उपचार
दिल के मरीजों की सही से पहचान करने के लिए एआई मशीन को लर्निंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें एम्स में आने वाले हजारों मरीजों के किए गए एक्सरे दिखाए जाएंगे।
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अचानक छाती में दर्द शुरू हो जाए, सीने में जकड़न महसूस हो, सांस की कमी लगे, गर्दन, जबड़े, गले, पेट, पैर या बाजुओं में दर्द महसूस होने लगे या फिर दिल की धड़कन धीमी या तेज हो जाए, तो अक्सर लोग डर जाते हैं। यह सभी दिल के रोगों के लक्षण हैं। समय रहते इनका पता चल जाए तो मरीज को अस्पताल लेकर जाएं, जिससे समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है, लेकिन अधिकतर लोग अज्ञानता के कारण समस्या को विकराल बना देते हैं।
ऐसी स्थिति में मरीजों की मदद के लिए एम्स भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली और रुड़की के साथ मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मशीन को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस मशीन को बनाने के लिए एम्स अस्पताल में आने वाले मरीजों का डेटा उपलब्ध करवा रहा है। हजारों मरीजों के रिकॉर्ड के आधार पर मशीन को लर्निंग करवाया जाएगा।
इसमें बड़ी बारीकी से बताया जाएगा कि कौन सा लक्षण किस बात का संकेत है। मशीन बनने के बाद केवल फोन पर ही परिजन को गाइड कर मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार मिल सकेगा। साथ ही उसे अस्पताल में लाना है या नहीं, किस अस्पताल में लेकर जाना है और इस दौरान स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए क्या सावधानी रखनी चाहिए, यह सब एआई मशीन की मदद से मरीज के परिजन को बताया जाएगा।
इस बारे में एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप सेठ ने बताया कि आईआईटी दिल्ली और रुड़की के साथ मिलकर एआई मशीन बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। यह काफी लंबा प्रक्रिया है और इसके लिए एम्स मरीजों के उपचार से जुड़ी रिपोर्ट व अन्य को मशीन में प्रोग्राम करने में मदद कर रहा है।
एम्स और आईसीएमआर मिलकर दिल का दौरा आने के बाद मरीज को गोल्डन आवर में इलाज देने के लिए मिशन दिल्ली अभियान चला रहे हैं। इसमें एक चिन्हित क्षेत्र में एम्स अपनी मोबाइल एंबुलेंस को भेजकर मरीज को तुरंत उपचार देती है। साथ ही जरूरत पड़ने पर मरीज को एम्स में लाने की व्यवस्था भी करवाती है।
दिल के मरीजों की सही से पहचान करने के लिए एआई मशीन को लर्निंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें एम्स में आने वाले हजारों मरीजों के किए गए एक्सरे दिखाए जाएंगे। साथ ही मशीन में फीड किया जाएगा कि कौनसा एक्सरे सही है या कौन का गलत है। इसमें छोटी से छोटी बारीकी से प्रोग्राम को स्टोर किया जाएगा, ताकि डॉक्टर की तरह मशीन भी एक्सरे देकर सटीक अनुमान लगा सके। इसके अलावा दिल की बीमारी का अनुमान लगाने के लिए मशीन में हजारों मरीज की ईसीजी, ईईजी, ईको सहित अन्य जांच रिपोर्ट को देखकर अनुमान लगाने का प्रोग्राम फीड किया जाएगा।
हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए एम्स हेल्पलाइन चला रहा है। इस हेल्पलाइन पर फोन करके मरीज अपने लक्षण बताकर अस्पताल आने या घर पर उपचार के संबंध में जानकारी हासिल कर सकता है। दरअसल एम्स में काफी संख्या में हार्ट फेलियर का उपचार करवा रहे मरीज पंजीकृत हैं। इन सभी मरीजों को एक नंबर दिया गया है, जिस पर फोन करके दिल के मरीज तुरंत उपचार हासिल कर सकते हैं।