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देश में पहली बार इस थेरेपी की मदद से एम्स ने बच्चे की आंख से निकाला ट्यूमर

Sun, 23 Apr 2017 04:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 23 Apr 2017 04:57 PM IST
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aiims successfully did pluck brechi therapy for first time in india of retonablastoma

देश में पहली बार एम्स को प्लक ब्रेची थेरेपी के माध्यम से रिटोनाब्लास्टोमा का इलाज करने में सफलता मिली है। एम्स के डॉक्टरों की टीम ने यूएसए के विशेषज्ञ की मदद से बच्चों की आंख का कैंसर यानी रिटोनाब्लास्टोमा का इलाज किया है।

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बच्चे की आंख के अंदर ट्यूमर को खत्म करने के लिए 12 घंटे तक रेडियो एक्टिव प्लक से रेडिएशन दिया गया। इस तकनीक से बच्चे को आंख की रोशनी के साथ नई जिंदगी भी मिली है।

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एम्स के आरपी सेंटर की डॉ. भावना चावला ने बताया कि दिल्ली का पांच साल से कम उम्र का बच्चा उनके पास जब पहुंचा था, तो एडवांस रिटोनाब्लास्टोमा (आंख का कैंसर) के चलते रोशनी जा चुकी थी और दूसरी आंख में भी ट्यूमर था।

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आंख के रेटिना के ऊपर छोटी सर्जरी करके रेडियो एक्टिव प्लक फिट किया

aiims successfully did pluck brechi therapy for first time in india of retonablastoma
aiims - फोटो : अमर उजाला

पहली आंख को बचाया नहीं जा सका, इसलिए उसे निकाल दिया गया और फिर दूसरी आंख को बचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। दूसरी आंख को कीमोथेरेपी व लेजर ट्रीटमेंट देना शुरू किया।

 

इसके तहत उसे प्लक ब्रेची थेरेपी देने की योजना बनाई। इसके लिए आंख के रेटिना के ऊपर छोटी सर्जरी करके रेडियो एक्टिव प्लक फिट किया गया। इस थेरेपी के माध्यम से रेडिएशन आंख के अंदर ट्यूमर पर दिया गया। इस थेरेपी में 12 से 24 घंटे या फिर दो से तीन दिन भी लग सकते थे।
 

हालांकि इस मरीज को 18 अप्रैल को 12 घंटे तक रेडियो एक्टिव पदार्थ डाला गया और 19 अप्रैल को निकाला गया। इसके बाद स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि इस बीमारी में मरीज में सुधार काफी समय बाद पता चलते हैं, इसलिए हमें भी दो हफ्ते के बाद फॉलोअप के लिए बुलाना होगा।

कई बच्चे जिंदगी से भी हार जाते हैं

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बता दें कि डॉ. आरपी सेंटर के प्रमुख प्रो. अतुल कमार, प्रो. भावना चावला, प्रो. सुषमिता और प्रो. सुब्रह्मानी शामिल थीं, जबकि यूएसए के क्लीवलैंड आई क्लीनिक के डायरेक्टर प्रो. अरुण सिंह उन्हें विशेषज्ञ के रूप में इस रिटोनाब्लास्टोमा बीमारी का इलाज करने की तकनीक बता रहे थे।

कई बच्चे जिंदगी से भी हार जाते हैं
डॉ. चावला ने बताया कि सेंटर में करीब तीन सौ बच्चे पहुंच रहे हैं, जिन्हें रिटोनाब्लास्टोमा होता है, जोकि एडवांस स्तर पर होता है। हालांकि जागरूकता के अभाव में कई बच्चे आंखों की रोशनी गंवाने के साथ-साथ जिंदगी से भी हार जाते हैं। यदि बच्चे की आंख की पुतली के पास बिल्ली की आंख की चमक की तर्ज पर कुछ चमकता दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह रिटोनाब्लास्टोमा का पहला लक्षण है। कई बार इस रिटोनाब्लास्टोमा के चलते ट्यूमर आंख के बाहर और कई मामलों में ब्रेन तक पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में बच्चे को बचाना मुश्किल होता है।

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