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AIIMS Study : आईसीयू में भर्ती सबसे ज्यादा मरीज खून से संक्रमित, इनमें से कई आ जाते हैं सुपर बग की चपेट में

Sat, 14 Oct 2023 04:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Oct 2023 04:45 AM IST
सार

इनमें से कई मरीज सुपर बग की चपेट में आ जाते हैं जिन पर कोई एंटीबायोटिक दवा असर नहीं कर पाती।

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AIIMS Study: Most patients admitted in ICU are infected with blood.
एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल

विस्तार

देशभर के चिकित्सा संस्थानों की आईसीयू में भर्ती एक हजार में हर दसवां मरीज रक्त संबंधित संक्रमण से पीड़ित है। इनमें से कई मरीज सुपर बग की चपेट में आ जाते हैं जिन पर कोई एंटीबायोटिक दवा असर नहीं कर पाती। ऐसे मरीजों को बचा पाना मुश्किल हो जाता है जबकि स्वच्छता सहित कुछ सावधानियों से ऐसे मरीजों को बचाया जा सकता है।

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दरअसल एम्स के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के नेतृत्व में देशभर के चिकित्सा संस्थानों के आईसीयू में भर्ती मरीजों के डाटा पर अध्ययन किया गया। अध्ययन के लिए स्वदेशी ऑनलाइन सुविधा विकसित की गई जिसमें देशभर के संस्थान आईसीयू से प्राप्त संक्रमणों की निगरानी, रोगाणुरोधी प्रतिरोध और संक्रमण नियंत्रण की जानकारी अपलोड करते हैं। यहां मई 2017 से जून 2023 के बीच 2472414 आईसीयू दिवस की जानकारी अपलोड हुई। इसके अध्ययन में सबसे ज्यादा मरीज सेंट्रल लाइन से जुड़े रक्तप्रवाह संक्रमण से पीड़ित पाया गया। यह संक्रमण कई कारणों से हुआ। इसमें साफ-सफाई, उपकरण का इस्तेमाल सहित अन्य कारण है।
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इस देशव्यापी निगरानी नेटवर्क अध्ययन के परिणाम के बारे में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर व निगरानी के प्रमुख डॉ. पूर्वा माथुर, ट्रामा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूक, और ट्रामा के अतिरिक्त एमएस डॉ. संजीव लावानी ने बताया कि अध्ययन के प्राथमिक आंकड़ों में सबसे ज्यादा खून से जुड़े संक्रमण पाए गए।
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आईसीयू में भर्ती मरीजों की इम्युनिटी काफी कमजोर होती है। ऐसे मरीजों को संक्रमण होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। अध्ययन में पाया गया कि आईसीयू में भर्ती रहे 789071 मरीज दिवस में सबसे ज्यादा 9.25 मरीज (प्रति एक हजार रोगी दिवस) खून के कारण संक्रमित पाए गए। वहीं मूत्र से संबंधित 1385872 मरीज का आंकड़ा मिला जिसमें मूत्र संबंधित संक्रमण के 3.05 (प्रति एक हजार रोगी दिवस) मरीज मिले। जबकि वेंटिलेटर के 55678 मरीज में 8.6 (प्रति एक हजार दिवस) और सर्जरी में इंफेक्शन में 19055 में 4.97 (100 सर्जरी पर) मरीज संक्रमित पाए गए।

स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े संक्रमण (एचएआई) का डाटा। अवधि - मई 2017-जून 2023

  • कुल मरीज दिवस - 2472414
  • सेंट्रल-लाइन दिन (एक हजार पर) - 789071
  • रक्तप्रवाह संक्रमण दर (एक हजार पर) - 6.36
  • सेंट्रल लाइन-एसोसिएटेड ब्लडस्ट्रीम संक्रमण दर (एक हजार पर) - 9.25
  • मूत्र-कैथेटर दिवस (एक हजार पर) - 1385872
  • मूत्र पथ संक्रमण (एक हजार पर) - 1.85
  • कैथेटर से जुड़े मूत्र पथ के संक्रमण (एक हजार पर) - 3.05
  • वेंटीलेटर दिवस (एक हजार पर) - 55678
  • वेंटीलेटर-संबंधी निमोनिया (एक हजार पर) - 8.6
  • सर्जरी की संख्या -19055
  • सर्जिकल साइट संक्रमण (100 पर) - 4.97

अमेरिका से पीछे, कम आय वाले देश से आगे
आईसीयू में संक्रमण के मामले में देश अमेरिका से काफी पीछे है। अमेरिका के आंकड़ों से मिलान में पाया गया कि यह लगभग तीन गुना ज्यादा है। वहीं कम आय वाले देश के
अध्ययन के मुकाबले भारत के अस्पतालों में होने वाले संक्रमण का आंकड़ा काफी बेहतर है।

उत्तर भारत में ज्यादा मामले
संक्रमण के अध्ययन में पाया गया कि नार्थ इंडिया के संस्थानों में संक्रमण ज्यादा है। जबकि साउथ इंडिया में कम। हालांकि राज्य स्तर पर संक्रमण को लेकर अभी डाटा का अध्ययन किया जा रहा है। इसके अलावा संस्थानों के आधार पर भी अध्ययन किया जाएगा।

तैयार होगी गाइडलाइन
आईसीयू में संक्रमण दर को कम करने के लिए डाटा अध्ययन के बाद गाइडलाइन तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, हालांकि इसे काफी कम किया जा सकता है। इसके लिए मानक तैयार किए जाएंगे। साथ ही नीति बनाकर सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।



पांच साल में घटा संक्रमण
पांच साल में संक्रमण का दर काफी कम हुआ है। पांच साल पहले जब इस जब संक्रमण की जांच शुरू हुई थी तब एक हजार मरीज में करीब 15 मरीज संक्रमण का शिकार पाए जा
रहे थे अब यह आंकड़ा घटकर एक हजार में 9 तक आ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसमें और सुधार किया जाए तो आंकड़ा और बेहतर हो सकता है।

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