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Delhi: एम्स शोधकर्ताओं का सुझाव- शराब से फैल रहा कैंसर, बोतलों पर भी चेतावनी लगाना जरूरी
Mon, 28 Jul 2025 06:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Jul 2025 06:15 AM IST
सार
डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल, एम्स, दिल्ली के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शंकर, डॉ. वैभव साहनी और डॉ. दीपक सैनी के लिखे एक शोध पत्र में यह सुझाव दिया गया है।
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- फोटो : freepic
विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रामाणिक तथ्य है कि तंबाकू की तरह शराब में भी कैंसरकारी तत्व पाया जाता है। लेकिन इस पर जागरूकता काफी कम है। ऐसे में जरूरी है कि शराब की बोतलों पर भी तंबाकू उत्पादों की तरह चेतावनी वाले लेबल लगाए जाएं।
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डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल, एम्स, दिल्ली के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शंकर, डॉ. वैभव साहनी और डॉ. दीपक सैनी के लिखे एक शोध पत्र में यह सुझाव दिया गया है। हाल में फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि बोतलों पर साक्ष्य-आधारित और पुख्ता चेतावनी लेबल लगाने से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी, जिससे कैंसर के मामलों में कमी लाई जा सकती है।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि चेतावनी लेबल के माध्यम से बदलाव का प्रयास हर आयु वर्ग के लोगों की उपभोग संबंधी आदतों में सकारात्मक परिवर्तन लाने में प्रभावी साबित हो सकता हैं। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में। क्योंकि इन देशों में सामाजिक स्तर पर कुछ वर्गों को मादक पदार्थों के सेवन के दुष्परिणामों के प्रति शिक्षित और संवेदनशील बनाना और भी ज्यादा जरूरी है।
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शोध में बताया गया कि भारत में कैंसर के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। 2012 से 2022 की अवधि के आंकड़ों से घटनाओं में 36 प्रतिशत की वृद्धि (10.1 लाख से 13.8 लाख) का संकेत मिलता है।
पांच वर्ष में नौ लाख लोगों ने गंवाई जान
ग्लोबोकैन (जीएलओबीओसीएएन) 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 14.1 लाख नए कैंसर के मामले सामने आए, जबकि पांच वर्षों में लगभग 32.5 लाख मामले सामने आए और कैंसर के कारण कुल 9,16,827 लोगों की मौत हुई। ग्लोबोकैन 2020 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति 1,00,000 लोगों पर शराब के कारण कैंसर की दर 4.7 प्रतिशत है।
औसतन 6.6 साल घट जाती है उम्र
शोधकर्ताओं ने बताया कि 2016 के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में रोग समायोजित जीवन वर्षों का आंकड़ा 6.6 प्रतिशत शराब के सेवन के कारण था, जबकि तंबाकू के सेवन के कारण यह प्रतिशत 10.9 प्रतिशत था। दूसरे शब्दों में शराब के सेवन के कारण होने वाली बीमारियों से लोगों की उम्र औसतन 6.6 साल घटी जबकि तंबाकू का सेवन करने वालों की उम्र में औसतन 10.9 वर्षों की कमी आई।
सात तरह के कैंसर होने का खतरा
शोधकर्ताओं ने जनवरी 2025 में अमेरिकी सर्जन जनरल की सलाह का हवाला देते हुए बताया कि शराब के सेवन से कोलन/मलाशय, यकृत, स्तन, आहारनली, कंठ, ग्रसनी व मुंह के कैंसर जैसे सात तरह के कैंसर होने का जोखिम स्पष्ट रूप से बढ़ जाता है। सलाह में शराब के सेवन और कैंसर के विकास के जोखिम के बीच यांत्रिक संबंधों का भी उल्लेख किया गया है।
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