Delhi AIIMS: एम्स अंतिम वर्ष के MBBS छात्रों के शिक्षण व प्रशिक्षण में करेगा बदलाव, 11 सदस्यीय कमेटी का गठन
निदेशक के आदेश में कहा गया है कि अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों के शिक्षण, प्रशिक्षण और मूल्यांकन के पैटर्न में सुधार लाने के लिए 11 सदस्य कमेटी बनाई गई है। यह पाया गया है कि व्याख्यान कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति कम होती है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली एमबीबीएस कर रहे अंतिम वर्ष के छात्रों के शिक्षण-प्रशिक्षण में बदलाव करने जा रहा हैं। एम्स एक ऐसी व्यवस्था तैयार करेगा, जिससे छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन की तैयारी करने के साथ अपनी पढ़ाई बेहतर ढंग से कर सकेंगे। साथ ही लर्निंग प्रोसेस को और बेहतर बनाने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण को मजबूत किया जाएगा। इसे लेकर एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने एक आदेश जारी कर एक समिति का गठन किया है।
निदेशक के आदेश में कहा गया है कि अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों के शिक्षण, प्रशिक्षण और मूल्यांकन के पैटर्न में सुधार लाने के लिए 11 सदस्य कमेटी बनाई गई है। यह पाया गया है कि व्याख्यान कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति कम होती है। छात्र पीजी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग कक्षाओं में अधिक समय देते हैं। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में शिक्षण और सीखने का तरीका बदल गया है। ऑनलाइन माध्यम और सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण की एक बड़ी भागीदारी सामने आई है। साथ ही दीर्घकालिक क्षमता निर्माण को लक्षित करने और देशव्यापी कार्यान्वयन के लिए एक मान्य मॉडल विकसित करने के लिए शिक्षण, नैदानिक प्रशिक्षण और मूल्यांकन के वर्तमान पैटर्न को संशोधित करने की आवश्यकता है। इसे तैयार करने के लिए समिति शिक्षण के वर्तमान प्रारूप में आवश्यक परिवर्तन के लिए सुझाव देगी।
समिति में डॉ पीयूष होंगे अध्यक्ष
समिति में डॉ पीयूष रंजन मेंडिसिन विभाग के प्रोफेसर अध्यक्ष होंगे। इनके अलावा डॉ. राकेश कुमार प्रोफेसर, ओटोलर्यनोलोजी विभाग, डॉ. रणवीर सिंह जादौन, अतिरिक्त प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, डॉ. मोहित जोशी, अतिरिक्त प्रोफेसर, सर्जरी विभाग, डॉ विदुषी कुलश्रेष्ठ, अतिरिक्त प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, डॉ अदिति सिन्हा, अतिरिक्त प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, डॉ. सिद्धार्थ सरकार, अतिरिक्त प्रोफेसर, मनोरोग विभाग और एनडीडीटीसी, डॉ कनिका साहिनी, अतिरिक्त प्रोफेसर, त्वचा विज्ञान और रतिज रोग विभाग, डॉ. विवेक शंकर, एसोसिएट प्रोफेसर, आर्थोपेडिक्स विभाग, डॉ. मनप्रीत कौर, सहायक प्राध्यापक, नेत्र विज्ञान विभाग, डॉ. मोहन बैरवा, सहायक प्राध्यापक, सामुदायिक चिकित्सा विभाग से सदस्य होंगे।
दूसरी जगह भी लागू हो सकता है यह पैटर्न
एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के छात्रों के शिक्षण प्रशिक्षण में सुधार को लेकर एम्स का आदेश अन्य अस्पतालों में भी लागू हो सकता है। दरअसल देश में अधिकतर अस्पताल एम्स के को आधार बना कर बदलाव करते हैं। एम्स के सुधार के बाद देश के अन्य अस्पताल भी छात्रों की शिक्षण प्रशिक्षण में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ऐसा होने पर देश भर में एमबीबीएस कर रहे हैं हजारों छात्रों को राहत मिलेगी।