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सुपरटेक और खरीदारों के बीच समझौता

Mon, 21 Apr 2014 08:52 AM IST
Updated Mon, 21 Apr 2014 08:52 AM IST
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Agreement between supertech and buyer

नोएडा में सुपरटेक और उसके दो विवादित टावरों में फ्लैट खरीदने वालों के बीच शनिवार को समझौता हो गया है। समझौते पर सुपरटेक के एमडी आरके अरोड़ा ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।

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दरअसल, ठोस आश्वासनों के बावजूद कंपनी खरीदारों को आश्वस्त नहीं कर पा रही थी। इसके बाद फ्लैट खरीदारों ने सुपरटेक से लिखित आश्वासन लिया।

सेक्टर-58 स्थित दफ्तर में सुपरटेक के एमडी आरके अरोड़ा और खरीदारों के बीच बैठक हुई। कई घंटे की बैठक के दौरान खरीदार लिखित आश्वासन के लिए अड़ गए। एक खरीदार सौरभ वर्मा ने बताया कि बिल्डर ने तीन शर्तों पर हस्ताक्षर किए हैं।

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ये तीन शर्तें, जिनपर हुआ समझौता

Agreement between supertech and buyer

एक खरीदार सौरभ वर्मा ने बताया कि बिल्डर ने तीन शर्तों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें पैसे वापसी विकल्प है। इसके अलावा फ्लैट देने का भी विकल्प है। सुपरटेक के विभिन्न स्थानों पर प्रोजेक्ट हैं।

खरीदार इनको देखकर, जिसमें रुचि हो उस फ्लैट को उचित दामों में ले सकते हैं। तीसरे बिंदु में बिल्डर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा, बायर्स चाहें तो वह साथ दे सकते हैं और जब विवाद तक विवाद का हल न हो, इंतजार करें। ये हैं तीन ‌बिंदू-

1-हाई कोर्ट के आदेश के तहत खरीदारों को 14 फीसदी ब्याज सहित बिल्डर पैसा वापस करने को तैयार।
2-सुपरटेक के किसी अन्य प्रोजेक्ट में खरीदार फ्लैट ले सकते हैं। इसके लिए उचित दाम ही रखे जाएंगे।
3-सुपरटेक ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे तो बायर्स साथ दें, जब भी फैसला होगा तब तक इंतजार करना होगा।

शाहबेरी में भी अपनाया था ये तरीका

Agreement between supertech and buyer

जुलाई 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। जिससे करीब एक दर्जन बिल्डर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे। इसमें करीब 20 हजार फ्लैट खरीदारों पर असर पड़ा था। कोर्ट ने उस वक्त भी ब्याज सहित पैसा वापस करने का आदेश दिया।

बिल्डरों की तरफ से ब्याज सहित पैसा वापसी, किसी दूसरे प्रोजेक्ट में फ्लैट या फिर इंतजार के रास्ते सुझाए गए थे। कुछ बायर्स ने पैसा वापस ले लिया था, लेकिन ज्यादातर ने दूसरे फ्लैट बुक करा लिए थे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश होने के कारण इस मामले में कानूनी रास्ते बंद थे। एक ही रास्ता बचा था कि प्राधिकरण दोबारा जमीन का अधिग्रहण करे और फिर बिल्डरों को प्लॉट बेचे।

करीब तीन साल होने को हैं प्राधिकरण अभी तक शाहबेरी की जमीन का दोबारा अधिग्रहण नहीं कर सका है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक प्राधिकरण ने किसानों को जमीन वापस कर दी थी। जब किसानों से मुआवजा वापस मांगा तो किसानों ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जब दोबारा जमीन ली जाएगी तो हिसाब कर लिया जाएगा। इस तरह से बिल्डर और प्राधिकरण को भी काफी हानि हुई थी।

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