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छह माह बाद नए रूप में दिखेगा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, इस खास तकनीक से निर्माण में बचेंगे 31 करोड़ रुपये

Wed, 23 Sep 2020 12:06 PM IST
पूजा त्रिपाठी सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 23 Sep 2020 12:06 PM IST
सार

- सीएस इंफ्रा करेगी रिसर्फेसिंग का काम, हॉट इन प्लेस रिसाइक्लिंग तकनीक से होगा निर्माण
- 20 किलोमीटर के क्षेत्र का होगा कायाकल्प

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After six months noida greater noida expressway to look totally different special technique to be use
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगामी छह माह में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का कायाकल्प हो जाएगा। हॉट इन प्लेस रिसाइक्लिंग तकनीक से एक्सप्रेसवे की मरम्मत की जाएगी। मंगलवार को सीएस इंफ्रा नाम की एजेंसी को इस काम के लिए चयनित किया गया है। 15 से 20 दिन में काम शुरू हो जाएगा।

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एक्सप्रेसवे पर महामाया फ्लाईओवर स्थित जीरो माइल से 20 किमी तक की दूरी में कायाकल्प करने की योजना है। यानी नोएडा के पूरे हिस्से का नवनिर्माण होगा। अभी यह तय नहीं किया गया है कि ग्रेनो की ओर के हिस्से का क्या होना है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद मरम्मत की जरूरत महसूस हो रही थी।
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2019 से इसके निर्माण की प्रारंभिक गतिविधियों के तहत टेंडर और एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आदि की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कोरोना के कारण काम ठंडे बस्ते में चला गया। अब इस प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया गया। इसके तहत चार एजेंसियों का चयन किया गया था। इनमें से एक का चयन अंतिम तौर पर किया गया।
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अब इस परियोजना की मिक्स डिजाइनिंग कराई जाएगी। यानी जिस तकनीक पर काम करना है, उसी आधार पर इसकी फिर से डिजाइनिंग होगी। इसका काम सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट करेगा। डिजाइनिंग का काम पूरा होने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू होगी। फिर निचली लेयर का काम होगा। इसके बाद ऊपरी सतह का काम होगा। 

20 से 30 प्रतिशत पुरानी सामग्री होगी प्रयोग

इंजीनियरों ने बताया कि प्रति किलोमीटर पर कोर कटिंग होगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि पुराना मैटेरियल नए निर्माण में कितना कारगर साबित होगा। इस आधार पर सबसे बेहतरीन मैटेरियल का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा उपयोग में लाया जाएगा।

अगर पुराने मैटेरियल की गुणवत्ता ठीक नहीं हुई तो प्रतिशत पहले से कम होता जाएगा। उन्होंने बताया कि रांची स्थित रिंग रोड समेत बंगलूरू में हॉट इन प्लेस तकनीक से काम हो चुका है। इसकी मदद से पुराना मैटेरियल उपयोग में लाया जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि इस तकनीक से बनी सड़क सात वर्ष तक नहीं टूटेगी। इसके अलावा काम भी तेजी से किया जा सकेगा।

काम के दौरान कैरेज होगा बंद
काम शुरू होने के दौरान एक्सप्रेसवे के एक-एक कैरेज को बंद करना होगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से पहले ही सचेत कर दिया जाएगा। इस रूट पर यातायात का दबाव काफी अधिक होता है, लिहाजा यहां काम करना चुनौती साबित होगी। 

31 करोड़ रुपये की होगी बचत
नई तकनीक से काम करने में प्राधिकरण को 31 करोड़ रुपये की बचत होगी। अगर पुरानी पद्धति से काम किया जाता तो इसकी लागत 92 करोड़ आती। जबकि, नई तकनीक से निर्माण में 61 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 

नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे की रिसर्फेसिंग के लिए एजेंसी का चयन हो चुका है। इसकी डिजाइनिंग कराने के बाद 15 से 20 दिन में काम शुरू करा दिया जाएगा। छह माह में सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा।-एसपी सिंह, सीनियर मैनेजर, वर्क सर्किल-10

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