दस्तावेज चोरी मामले में FIR के सवा साल बाद भी फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
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पेट्रोलियम मंत्रालय दस्तावेज लीक मामले में एफआईआर के सवा साल बाद भी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का पुलिस को इंतजार है। पुलिस व सरकारी विभागों की सुस्ती का आलम यह है कि एफआईआर के 14 महीने बाद भी फोरेंसिक रिपोर्ट न मिलने के कारण आरोपों पर बहस शुरू नहीं हो सकी है।
अदालत ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि पुलिस कब तक फोरेंसिक जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी, ताकि आरोपों पर बहस शुरू की जा सके। यह बेहद संवेदनशील मामला था, जिसमें सरकार व मंत्रालयों के दस्तावेज की चोरी का पर्दाफाश हुआ था।
पेश मामले में 13 आरोपियों में रिलायंस समेत एनर्जी सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के पांच वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में दो एफआईआर दर्ज कर 16 लोगों को गिरफ्तार किया था। फिलहाल ये सभी आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं।
दस्तावेज की कॉपी देने व इनका निरीक्षण करने का निर्देश
पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम सुमित दास ने पुलिस को शीघ्र एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त करने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तारीख तय की है। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि उन्हें चार्जशीट के साथ पेश किए गए पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं।
अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 13 आरोपियों को चार्जशीट के साथ संलग्न दस्तावेज व सीडी देने के निर्देश दिल्ली पुलिस को दिए गए हैं। अदालत ने इससे पहले भी आरोपियों को दस्तावेज की कॉपी देने व इनका निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शैलेश सक्सेना, एस्सार के विनय कुमार, कैन्स इंडिया के केके नायक, जुबीलेंट एनर्जी के सुभाष चंद्रा व रिलायंस एडीएजी के ऋषि आनंद समेत 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
इस मामले में इन लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
पेश मामले के अन्य आरोपियों में पेट्रोलियम मंत्रालय के स्टाफ ईश्वर सिंह व आशाराम, पूर्व कर्मचारी लालता प्रसाद व राकेश कुमार, रक्षा मंत्रालय के वीरेंद्र कुमार, राजकुमार चौबे, एनर्जी सलाहकार प्रयास जैन व पत्रकार शांतनु सेकिया शामिल हैं।
पुलिस ने कोर्ट को मामले की जानकारी देते हुए बताया था कि जांच के दौरान आरोपियों से आठ वर्गीकृत दस्तावेज बरामद हुए थे और ये दस्तावेज सार्वजनिक नहीं थे। हालांकि पुलिस ने दस्तावेज को वर्गीकृत बताया था, लेकिन आरोपियों के खिलाफ गोपनीय दस्तावेज अधिनियम नहीं लगाया था।
दिल्ली पुलिस ने 20 फरवरी 2016 को कॉरपोरेट जगत के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि ये लोग लालता प्रसाद व राकेश कुमार को पैसे देकर गोपनीय दस्तावेज हासिल करते थे। इसके बाद आरोपी कॉरपोरेट अधिकारी ये दस्तावेज अपनी कंपनियों को देते थे, ताकि कंपनियों का फायदा हो सके। पुलिस ने इस मामले में प्रयास जैन, शांतनु सेकिया, ईश्वर सिंह, आशाराम व राजकुमार चौबे को पेट्रोलियम व गैस मंत्रालय समेत कई मंत्रालयों के संवेदनशील दस्तावेज चुराने की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था।