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नियमों का ताक पर रखकर अस्पताल बनाने व एनओसी लेने के बाद बदलाव करने पर होगी कार्रवाई
Fri, 08 Feb 2019 07:17 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: राजेश सैनी
Updated Fri, 08 Feb 2019 07:17 AM IST
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metro hospital fire
- फोटो : अमर उजाला
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मेट्रो अस्पताल में लगी आग के बाद जिलाधिकारी ने जिले भर के अस्पतालों की व्यवस्था जांचने के निर्देश दिए हैं। इसमें दमकल के साधनों के अलावा आपातकालीन निकास को विशेष तौर पर निरीक्षण किया जाएगा। जिलाधिकारी ने ऐसे अस्पतालों पर विशेष तौर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं जिन्होंने नियमों का ताक पर रखकर अस्पताल बना लिया है अथवा एनओसी लेने के बाद अस्पताल में बदलाव कर दिया है जिससे किसी घटना के दौरान राहत कार्य करने में परेशानी आती हो।
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बृहस्पतिवार को मेट्रो अस्पताल में आग की दुर्घटना के बाद डीएम बीएन सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने मरीजों की जानकारी लेने के प्रत्येक फ्लोर पर जाकर मुआयना किया और जब संतुष्ट हो गए कि अब कोई भी मरीज अस्पताल में नहीं है तो ही बाहर निकले। उन्होंने नोएडा-ग्रेटर नोएडा नगर मजिस्ट्रेट और सभी एसडीओ को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्र में यह जांच कराए कि अगर किसी अस्पताल में कोई हादसा होता है तो बचाव कार्य होने में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आएगी। अगर किसी अस्पताल ने एनओसी लेने के बाद निर्माण कार्य में बदलाव किया है जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही, ऐसे निर्माण को हटवाया जाए।
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मेट्रो अस्पताल हादसे की होगी मजिस्ट्रेटी जांच
जिलाधिकारी ने मेट्रो अस्पताल में हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल की ओर से कोई लापरवाही बरती गई है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। हालांकि, बड़ी बात यह है कि 66 मरीजों में से किसी को नुकसान नहीं हुआ है और समय रहते उनको दूसरे अस्पताल में दाखिल करा दिया गया।
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हाईड्रोलिक प्लेटफार्म भी बचाव कार्य करने में रहा असफल
दमकल विभाग की ओर से हाईड्रोलिक प्लेटफार्म सिस्टम के माध्यम से 5वें फ्लोर से मरीजों को उतारने का प्रयास किया गया लेकिन हाइड्रोलिक प्लेटफार्म से केवल एक मरीज को ही उतारा जा सका। अस्पताल के अंदर जाने के लिए जगह नहीं थी और बाहर सड़क पर खड़े होकर हाइड्रोलिक प्लेटफार्म अस्पताल तक पहुंच नहीं पा रहा था। इसलिए मरीजों को सीढ़ियों से ही बाहर निकाला जा सका। वहीं काफी दिन बाद हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के प्रयोग में आने से 10 से 15 मिनट तक उसे शुरू करने में लग गए।