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#MeToo: महिला सेफ्टी ऑडिट न कराने पर 3000 कंपनियों को जाएगा नोटिस
शाहनवाज आलम, अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Sun, 14 Oct 2018 01:21 PM IST
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देशभर में चल रहे ‘मी टू’ अभियान को देखते हुए जिला प्रशासन कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013 को सख्ती से लागू कराने की तैयारी में है। जिले में मौजूद कंपनियों का सेफ्टी ऑडिट शुरू कर दिया गया है।
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करीब 3000 ऐसी कंपनी पाई गई है, जिन्होंने महिला सेफ्टी रिटर्न फाइल नहीं किया है। अब जिला प्रशासन ने इनसे जवाब तलब करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन कंपनियों में विभिन्न उत्पादन संबंधी उद्योग, सर्विस बेस्ड कंपनी, स्टार्टअप समेत अन्य कार्यस्थल शामिल हैं।
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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए 9 दिसंबर 2013 को लागू इस अधिनियम के तहत जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन पर यह लागू होता है। इसके तहत सबसे पहले हरियाणा में गुरुग्राम में जिला स्तरीय स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) का गठन किया गया था।
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उसने सर्वे के दौरान पाया कि करीब 5500 कंपनियां गुरुग्राम में संचालित हैं। इनमें बड़ी एवं मध्यम दर्जे के करीब 2500 कंपनियों ने यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम के तहत सुरक्षा ऑडिट कर रिपोर्ट दी है, जबकि बाकी कंपनियों ने जानकारी ही नहीं दी है।
शहर में छोटी-बड़ी कई कंपनियां हैं। 10 से ज्यादा कर्मियों वाली कंपनियों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। किसी कंपनी के कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न किया है तो आंतरिक समिति को शिकायत की जा सकती है।
कंपनी के मालिक या उच्च अधिकारी के खिलाफ शिकायत है तो सीधे तौर पर एलसीसी को दे सकते हैं। एलसीसी चेयरमैन अनुराधा शर्मा का कहना है कि कई कंपनियों में आंतरिक कमेटियां नहीं हैं। इसके बारे में पता करके वहां जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। वहां कमेटियों का गठन कराया जा रहा है।
अभी बहुत सारी कंपनियों ने महिला सुरक्षा को लेकर बनाई जाने वाली कमेटी के संबंध में एलसीसी को रिपोर्ट नहीं दी है। ऐसे में सभी कंपनियों को नोटिस भेजकर रिपोर्ट तलब होगी। फिर भी रिपोर्ट नहीं दी जाती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।- अनुराधा शर्मा, चेयरमैन, जिला स्तरीय स्थानीय शिकायत समिति
जानने योग्य बातें
- शिकायत समितियों को सबूत जुटाने में सिविल कोर्ट वाली शक्तियां हैं।
- निजी और सार्वजनिक दोनों की महिला कर्मचारियों के कार्यस्थल शामिल हैं।
कब कर सकते हैं शिकायत
अधिनियम के अनुसार, शिकायत करते समय घटना को घटे तीन महीने से ज्यादा समय नहीं बीता हो। एक से अधिक घटनाएं हुई हैं तो आखिरी घटना की तारीख से तीन महीने तक का समय पीड़ित के पास है। यदि आंतरिक शिकायत समिति को लगता है कि इससे पहले पीड़ित शिकायत करने में असमर्थ थी तो यह सीमा बढ़ाई जा सकती है।
कंपनी के मालिक या उच्च अधिकारी के खिलाफ शिकायत है तो सीधे तौर पर एलसीसी को दे सकते हैं। एलसीसी चेयरमैन अनुराधा शर्मा का कहना है कि कई कंपनियों में आंतरिक कमेटियां नहीं हैं। इसके बारे में पता करके वहां जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। वहां कमेटियों का गठन कराया जा रहा है।
अभी बहुत सारी कंपनियों ने महिला सुरक्षा को लेकर बनाई जाने वाली कमेटी के संबंध में एलसीसी को रिपोर्ट नहीं दी है। ऐसे में सभी कंपनियों को नोटिस भेजकर रिपोर्ट तलब होगी। फिर भी रिपोर्ट नहीं दी जाती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।- अनुराधा शर्मा, चेयरमैन, जिला स्तरीय स्थानीय शिकायत समिति
जानने योग्य बातें
- शिकायत समितियों को सबूत जुटाने में सिविल कोर्ट वाली शक्तियां हैं।
- निजी और सार्वजनिक दोनों की महिला कर्मचारियों के कार्यस्थल शामिल हैं।
कब कर सकते हैं शिकायत
अधिनियम के अनुसार, शिकायत करते समय घटना को घटे तीन महीने से ज्यादा समय नहीं बीता हो। एक से अधिक घटनाएं हुई हैं तो आखिरी घटना की तारीख से तीन महीने तक का समय पीड़ित के पास है। यदि आंतरिक शिकायत समिति को लगता है कि इससे पहले पीड़ित शिकायत करने में असमर्थ थी तो यह सीमा बढ़ाई जा सकती है।