आपातकाल फ्लैशबैकः जेल जाने के कारण छूट गई थी विष्णुदत्त एरन की बीए की पढ़ाई
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1975 के आपातकाल के दौरान की एक-एक बात आज भी याद आ जाती है। पुलिस ने पहले वांछित घोषित किया और फिर छह माह बाद जेल भेज दिया। जेल में बिताए 9 महीने ऐसे थे, जैसे जिंदगी में कुछ नहीं बचा है।
जेल से बाहर आया तो पता चला कि पढ़ाई भी बर्बाद हो चुकी है, लेकिन हार नहीं मानी और फिर से बीए की पढ़ाई पूरी की। आपातकाल की अपनी इन यादों को ताजा कर जेवर निवासी लोकतंत्र सेनानी विष्णु दत्त एरन भावुक हो गए।
25 जून 1975 के आपातकाल के बारे में विष्णुदत्त एरन ने बताया कि 25 जून को जेवर पुलिस ने उसे वांछित घोषित कर दिया। उस समय वे बुलंदशहर के सिकंद्राबादा स्थित जेएस डिग्री कॉलेज में बीए अंतिम वर्ष के छात्र थे।
30 दिसंबर 1975 को कॉलेज के बाहर से उन्हें गिरफ्तार कर बुलंदशहर जेल में डाल दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें मीसा कानून के तहत पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस कानून के तहत गिरफ्तारी को कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
संविधान के मौलिक अधिकार भी खत्म कर दिए गए थे। बाद में विवि ने भी ब्लैक लिस्ट कर दिया। मेरी डिग्री पर रोक लगा दी। 19 माह बाद जब आपातकाल खत्म हुआ तो जेल से बाहर आया। तब पता चला कि बीए की पढ़ाई बर्बाद हो चुकी है।
हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से बीए की पढ़ाई पूरी की। जेल में रहने के दौरान जीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ। परिवार के लोगों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि, उनका कहना है कि आज लोकतंत्र के जिंदा रहने की खुशी होती है। विष्णुदत्त एरन के अलावा ओमप्रकाश शर्मा, थोरा से रघुराज सिंह, नीमका गांव से वेदपाल सिंह, रबूपुरा से किशनलाल पाराशर भी जेल गए।
एक साल जेल में बहुत यातनाएं झेलीं : नेमचंद शर्मा
बिलासपुर के सलेमपुर गुर्जर निवासी नेमचंद शर्मा अटल को आपातकाल के दौरान 17 जुलाई 1975 कि रात को मंडी श्याम नगर घर से उठाकर पुलिस ने बुलंदशहर जेल में बंद कर दिया।
वहां एक दिन रखने के बाद 18 जुलाई को आगरा जेल भेज दिया गया। उन दिनों वे सिकंद्राबाद सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य थे। पुलिस आधी रात में उन्हें उठाकर ले गई। जेल में एक साल तक रहे। वहां काफी यातनाएं दी गईं।
जेल में उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास गुप्ता, दनकौर के गांव देवटा निवासी चौधरी तेज सिंह, दनकौर के गिरधारी लाल नगर पंचायत के चेयरमैन, व्यापारी बनवारीलाल, प्रकाश चंद नेताजी, दनकौर विवेकानंद विद्यापीठ के प्रधानाचार्य लेखराज सिंह भी रहे।