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EXIT POLL के बाद बिजली कंपनियों में केजरीवाल का खौफ

Sun, 08 Feb 2015 11:09 PM IST
Updated Sun, 08 Feb 2015 11:09 PM IST
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 after Exit Poll fear of kejriwal in power companies

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान के बाद आए एग्जिट पोल से दिल्ली की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को 440 वोल्ट का झटका लगा है। डिस्कॉम्स को भी लगने लगा है कि सारे एग्जिट पोल गलत साबित नहीं होंगे।

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डिस्कॉम्स अंदर ही अंदर मान चुकी है कि अब लगता नहीं कि बिना सीएजी ऑडिट दिल्ली में बिजली कीमत तय होने वाली है। 49 दिनों की सरकार में मुख्यमंत्री के साथ-साथ ऊर्जा मंत्री रहे अरविंद केजरीवाल ने बिजली कंपनियों को अपने तेवर दिखाए थे।

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बिजली कंपनियों का कहना है कि केजरीवाल के काम करने के तौर-तरीकों से अनजान नहीं हैं, इसलिए डिस्कॉम्स मान कर चल रही है कि जनता से किए वादे के अनुसार आप सरकार का सबसे ज्यादा फोकस बिजली पर ही होगा।

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बड़े अधिकारी कर रहे हैं हिसाब-किताब

 after Exit Poll fear of kejriwal in power companies

डिस्कॉम्स के बड़े अधिकारी अभी से हिसाब-किताब ठीक कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर फौरन केजरीवाल को वास्तविकता से अवगत कराएंगे। कंपनियां अब सीएजी ऑडिट को मुद्दा नहीं बनाने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि डिस्कॉम्स को पता है कि केजरीवाल ने जनता से वादा किया है कि बिना ऑडिट दिल्ली में बिजली की कीमत नहीं बढ़ेगी।


दूसरी ओर, कंपनियों का यह भी कहना है कि बिना बिजली राजधानी को एक दिन नहीं रखा जा सकता, लिहाजा उन पर डंडा चलाना भी इतना आसान नहीं होगा। दिल्ली सरकार के साथ डिस्कॉम्स का वर्ष 2025 तक के लिए अनुबंध है, लिहाजा शर्तों के अनुसार अनुबंध खत्म करना भी इतना आसान नहीं होगा।

तीनों बिजली वितरण कंपनियों में करीब 20 हजार लोग स्थायी या अस्थायी तौर पर कार्य कर रहे हैं। इसमें हजारों की संख्या में दिल्ली विद्युत बोर्ड में काम कर चुके कर्मचारी और अधिकारी कार्य कर रहे हैं।

कर्ज लेकर काम कर रही हैं कंपनियां

 after Exit Poll fear of kejriwal in power companies

डिस्कॉम्स के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर यह भी कहा कि पहले भी दिल्ली सरकार एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का जिम्मा देना चाहती थी, लेकिन कोई कंपनी घाटे में काम नहीं कर सकती।

डिस्कॉम्स का कहना है कि बीएसईएस की राजधानी और यमुना पावर लिमिटेड अलग-अलग बैंक से 10 हजार रुपये से अधिक का लोन लेकर काम कर ही हैं जबकि टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का भी बैंक पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये कर्ज है।

बिजली वितरण कंपनी राजधानी और यमुना पावर लिमिटेड की आर्थिक स्थिति ज्यादा खराब है। बीएसईएस पर दिल्ली सरकार की ट्रांसमिशन कंपनी दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड, बिजली उत्पादन कंपनी आईपीजीसीएल और प्रगति पावर लिमिटेड का करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये बकाया है। राशि का भुगतान नहीं होने से ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने में भी दिल्ली सरकार को दिक्कत आ रही है।
डिस्कॉम्स के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर यह भी कहा कि पहले भी दिल्ली सरकार एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का जिम्मा देना चाहती थी, लेकिन कोई कंपनी घाटे में काम नहीं कर सकती।

डिस्कॉम्स का कहना है कि बीएसईएस की राजधानी और यमुना पावर लिमिटेड अलग-अलग बैंक से 10 हजार रुपये से अधिक का लोन लेकर काम कर ही हैं जबकि टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का भी बैंक पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये कर्ज है।

बिजली वितरण कंपनी राजधानी और यमुना पावर लिमिटेड की आर्थिक स्थिति ज्यादा खराब है। बीएसईएस पर दिल्ली सरकार की ट्रांसमिशन कंपनी दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड, बिजली उत्पादन कंपनी आईपीजीसीएल और प्रगति पावर लिमिटेड का करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये बकाया है। राशि का भुगतान नहीं होने से ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने में भी दिल्ली सरकार को दिक्कत आ रही है।

ये है इन कंपनियों की वास्तविक स्थिति

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दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) दिल्ली में बिजली कीमत तय करता है। आयोग ने वित्त वर्ष-2011-12 तक बिजली कंपनियों का घाटा 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का मान चुकी है और रकम की पूर्ति के लिए उपभोक्ताओं से कुल बिजली बिल का आठ प्रतिशत सरचार्ज के रूप में लिया जा रहा है। वित्त वर्ष-2012-13 और 2013-14 में डिस्कॉम्स ने अपना घाटा करीब 27 हजार करोड़ रुपये का बताया है। हालांकि अभी इस पर आयोग की अंतिम मुहर नहीं लगी है। पिछले दो वर्ष से आप के आंदोलन और दिल्ली में राजनीतिक उठापटक से भी फैसले में देरी हो रही है।

पिछले तीन से चार वर्षों में दिल्ली विद्युत आयोग ने दिल्ली में जितनी बार भी कीमत बढ़ाई, कंपनियों को रास नहीं आया। लिहाजा आयोग के ज्यादातर फैसलों के खिलाफ डिस्कॉम्स ने ऊपरी अदालत में अपील कर रही है और कहा है कि जितनी बिजली कीमत बढ़ाई गई है, वह काफी कम है। डिस्कॉम्स घाटे में चल रही है।

अधिकारी कहते हैं कि राजनीति से जुड़े सवाल पर आयोग कुछ नहीं कह सकता। बिजली की कीमत पर फैसला कब होगा, यह अभी नहीं बताया जा सकता। सीएजी ऑडिट के बारे में भी आयोग कुछ नहीं कह सकता। बिजली कंपनियों का कितना बकाया है यह भी नहीं कहा जा सकता।

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