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जानें क्यों खास बन गया 1972 में हुआ JNU का पहला और आखिरी दीक्षांत समारोह

Mon, 29 Jan 2018 03:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 29 Jan 2018 03:32 PM IST
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after 46 years jnu will host second convocation this year, know why first was special
- फोटो : हिंदुस्तान टाइम्स

आज से लगभग 46 साल पहले जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविघालय) में दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ था। साल 1972 में आयोजित वह पहला और आखिरी दीक्षांत समारोह था।

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जिसे अभिनेता बलराज साहनी के उग्र भाषण ने यादगार बना दिया था। इस साल जेएनयू अपना दूसरा दीक्षांत समारोह आयोजित करने वाला है।  

जेएनयू के अधिशिक्षक-II, एससी गारकोटी, संचालन समीति के चेयरपर्सन का कहना है कि  इस साल के दीक्षांत समारोह में केवल पीएचडी के छात्रों को डिग्री दी जाएगी पर अगले साल से बाकी कोर्सिस को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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आपको बता दें कि विश्वविघालय में होने वाले इंवेट को सुचारू रूप से संपन्न करने की जिम्मेदारी एससी गारगोटी की है। 

अभिनेता बलराज साहनी ने दिया था भाषण

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46 साल पहले आयोजित दीक्षांत समारोह में अभिनेता और थियेटर पर्सनेलिटी बलराज साहनी ने एक भाषण दिया था जिसे (सेंटर फॉर तुल्नात्मक राजनीति और राजनीतिक थियोरी) प्रोफेसर कमल मित्रा चेनोये ने उग्र भाषण बताया है।

साहनी के भाषण की ट्रांसस्क्रीप्ट के अनुसार,  उन्होंने कहा था, मसीहा हमें साहस देता है अपनी दास्तां वाली मानसिकता को छोड़ने, मूल्य उत्न्न करने और एक स्वतंत्र और मुक्त देश के लिए हमें अपने भाग्य को उनसे जोड़ना होगा जो शासन करते हैं ना कि खुद शासित होते हैं। 

इस बार के दीक्षांत समारोह का आइडिया है कि यह उन विवादास्पद स्थितियों को छोड़कर होगा जो कि पहले समारोह के मंच पर हुआ था।

तकरीबन दो प्रोफेसर और एक छात्र ने उस समय की सरकार को पूंजिवादी जमींदार कहा था। उसे एक अलग तरह का भाषण कहा जाता है जिसे तत्कालीन वीसी जी पारथासारथी ने मंजूरी दी थी। हालांकि इस बात की पुष्टि हिंदुस्तान टाइम्स ने पूरी तरह से नहीं की है।

क्या इतिहास दोहराएगा खुद को

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चेनाए का कहना है कि मिडिया ने उस टॉपिक को उठा लिया था, क्योंकि एक छात्र के लिए इस तरह की चीजें कहना बहुत बड़ी बात थी।

हालांकि इस बार होने वाले दीक्षांत समारोह की तारीख अभी तक फाइनल नहीं हुई है, लेकिन रजीस्ट्रार ऑफिस के सर्कुलर के अनुसार यह फरवरी के आखिरी हफ्ते या मार्च के पहले हफ्ते में आयोजिक हो सकता है। 

गारकोटी का कहना है कि हम सकारात्मकता को बढ़ावा देना चाहते हैं, क्यों केवल हमारे छात्र अपने पीएचडी के शोध जमा करें और चले जाएं? 

जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की प्रेजिटेंट गीता कुमारी का कहना है कि हमें दीक्षांत समारोह के होने से किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है, पर यह उसपर निर्भर करता है जिसे गेस्ट बनाकर बुलाया जाएगा।

एक सबसे बड़ा सवाल यह है जिसे एक छात्र द्वारा पूछा गया कि क्या इतिहास इस साल कैंपस में खुद को दोहराएगा।

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