इस शर्मनाक सच के साथ, कैसे पूरा होगा स्वच्छ भारत अभियान
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प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के बाद दिल्ली की तीनों नगरपालिकाएं दावा कर रही है कि उन्होंने दिल्ली में खुले सार्वजनिक शौचालयों को रिपेयर किया है और उन्हें साफ रखा जा रहा है, लेकिन दिल्ली की सार्वजनिक टॉयलेट्स की कहानी इनके दावों से अधूरी नजर आती है।
आज वर्ल्ड टॉयलेट डे पर मौका है दिल्ली के कुछ इलाकों के टॉयलेट्स की स्थिति को जानने का जहां दिल्ली कॉरपोरेशन तो दूर की बात स्वच्छ भारत मिशन की आहट भी नहीं पहुंची है। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली को यूं ही छोड़ दिया गया तो देश का ये साफ स्वच्च मिशन अपने अभियान को कैसे पूरा कर पाएगा।
दिल्ली के कुछ सुलभ शौचालयों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है तो कुछ इलाकों के लोग ही इन टॉयलेट्स को साफ कर, स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग करते नजर आते हैं। दिल्ली की नगर पालिकाओं के 100 दिनों के सेनिटेशन ड्राइव का असर यहां दिखाई नहीं देता। दिल्ली के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की बात करें तो, वहां या तो टॉइलेट बिना साफ-सफाई के ही बंद हो गए हैं, या फिर अपनी बद्तर हालात के लिए खुद की जिम्मेदार मान रहे हैं।
वहीं वरिष्ठ अधिकारी दावा करते हैं कि उन्होंने पब्लिक टॉयलेट्स की जरुरत का पता लगाने के लिए सर्वे कराने के निर्देश दे दिये हैं। पुराने टॉयलेट्स की मरम्मत की जा रही है। सभी कॉरपोरेशन ज्यादा से ज्यादा पब्लिक टॉयलेट्स बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। लेकिन क्या दिल्ली के टॉयलेट्स की स्थिति देखिए अगली स्लाइड में।
ऐसा है दिल्ली के टॉयलेट्स का हाल
ये कहानी है दिल्ली के हरीनगर के बाजार कि जो कि आश्रम चौक के नजदीक पड़ता है, लेकिन ये टॉयलेट अपनी स्थिति को लेकर परेशान है। इस परेशानी को दूर करने के लिए दिल्ली नगर निगम का कोई कर्मचारी यहां नहीं पहुंचा। टायलेट को साफ करने के लिए यहां पानी की व्यवस्था भी मौजूद नहीं है। हां इतना जरुर है कि 100 दिन के सेनिटेशन ड्राइव में खुद लोगों ने ही यहां के इस टॉयलेट को साफ करने की पहल की।
साउथ दिल्ली के इलाकों में बने पेशाब घरों की मरंमत तो की गयी है, लेकिन फिलहाल ये बंद ही दिखाई देते हैं। हां कुछ जगह प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के बाद से सकारात्मक बदलाव भी दिखाई देते हैं। कुछ जगह जहां पब्लिक टॉयलेट्स की स्थिति बेहद खराब थी उनमें सुधार हुआ है।
उत्तर नगर पालिका के जिम्में 1180 टॉयलेट्स और 542 कम्यूनिटी टॉयलेट कॉम्पलेक्स, वहीं पूर्वी दिल्ली नगर पालिका के पास 289 टॉयलेट्स, और 101 कम्यूनिटी टॉयलेट कॉम्प्लेक्स हैं। वहीं साउथ कॉरपोरेशन के पास 1688 पेशाब घर हैं।
अधिकारियों के मुताबिक बदलाव हो रहा है, हां इतना जरुर है कि उसकी गति थोड़ी धीमी है। कुछ ऐसे पेशाबघर भी मौजूद हैं जो बिना पानी के हैं। हमने इन पेशाबघर और टॉयलेट के रख रखाव की स्थिति पर नियंत्रण करना शुरु कर दिया है। बहुत सारा काम है जो कि किया जाना हैं। एसडीएमसी और ईडीएमसी कमिश्नर मनीष गुप्ता के मुताबिक लोगों के सहयोग की द्वारा ही साफ शहर का मिशन पूरा किया जा सकता है।