अब साकार होगा सस्ते घर का सपना
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घर खरीदना आने वाले दिनों में आपके लिए सस्ता हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा प्रदान कर दिया है।
रिजर्व बैंक के इस कदम से मेट्रो शहर में 65 लाख रुपये तक की कीमत वाले घर और छोटे शहरों में 50 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों के निर्माण का बढ़ावा मिलेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने से रीयल एस्टेट डेवलपर्स को बैंकों से आसानी से और एक फीसदी तक सस्ती दरों पर कर्ज मिल सकेगा। इसका फायदा घरों की कीमतों में कमी के रूप में ग्राहकों को मिलेगा।
हाउसिंग सेक्टर को मिलेगा बूस्ट
मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के छह मेट्रो शहरों को छोड़कर बाकी शहरों के लिए 50 लाख रुपये की कीमत और 40 लाख रुपये तक का होम लोन अफोर्डेबल हाउसिंग वर्ग में निर्धारित दिया है।
जबकि नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बंगलूरू और हैदराबाद के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग में घर की कीमत 65 लाख और होम लोन की सीमा 50 लाख तय कर दी है।
आरबीआई के कदम पर नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन नवीन रहेजा का कहना है कि इस कदम से हाउसिंग सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। डेवलपर्स को सस्ता कर्ज मिलने से लंबी अवधि में घरों की कीमतों में कमी आएगी। इसके अलावा हमें उम्मीद है कि होम लोन की दरों में भी इस कदम के बाद कमी आएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को कर्ज मिलना हुआ आसान
सड़क, बिजली, बंदरगाह, गैस आदि जैसे बुनियादी क्षेत्रों को कर्ज अब आसानी से मिल सकेगा। रिजर्व बैंक ने बैंकों को इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए लंबी अवधि के बांड जारी करने की अनुमति दे दी है। इसके अलावा ऐसे बांड के जरिए पूंजी जुटाने पर बैंकों को सीआरआर और एसएलआर के मानकों को पूरा नहीं करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि बैंकों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर को कर्ज देने के लिए ज्यादा पूंजी होगी।
इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर बांड पर प्राथमिकता क्षेत्र के नियम भी लागू नहीं होंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर बांड पर न्यूनतम परिपक्वता अवधि 7 साल होगी। बैंक इसके लिए निवेशक को फिक्स्ड या फ्लोटिंग रेट पर रिटर्न का विकल्प भी दे सकेंगे।
कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पाल के अनुसार बैंक अभी तक कम अवधि की पूंजी जुटाकर इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबी अवधि का कर्ज दे रहे थे। इस असमानता को आरबीआई ने दूर कर सेक्टर को बूस्ट देने की कोशिश की है।