स्विमिंग पूल से बॉल निकालने के दौरान पाइप में फंसा था आदित्य का हाथ, 9 दिन बाद मौत
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नोएडा सेक्टर-78 स्थित महागुन माडर्न सोसायटी में 29 जून की शाम को स्वीमिंग पूल में डूबे 9 साल के आदित्य की आज सर गंगाराम अस्पताल में मौत हो गई। आदित्य की मौत के बाद उसके परिवार में मातम पसर गया है।
गौरतलब है कि 29 जून की शाम आदित्य स्विमिंग पूल से बॉल निकालने गए आदित्य का हाथ पानी बाहर निकालने वाले पाइप में फंस गया। इससे उसका मुंह 3 से 4 मिनट तक पानी के अंदर रहा।
बच्चे को डूबते देख सोसायटी के गार्ड ने उसे पानी से बाहर निकाला। इसके बाद बच्चे को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने से उसे फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। यहां पर बच्चा वेंटिलेटर पर था। हालत और बिगड़ने पर बृहस्पतिवार शाम को परिजन बच्चे को गंगाराम अस्पताल ले गए।
सोसायटी के पास स्वीमिंग पूल चलाने की एनओसी थी
सोसायटी के लोगों ने बताया कि हादसे के दौरान टीसीएस कंपनी में काम करने वाले आदित्य के पिता आनंद बंगलूरू में थे। स्वीमिंग पूल में ऑक्सीजन और लाइफ गार्ड की व्यवस्था नहीं है।
वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट बच्चू सिंह ने बताया कि हादसे की जानकारी मिली है। सोसायटी के पास स्वीमिंग पूल चलाने की एनओसी थी, लेकिन लाइफ गार्ड नहीं थे। इस मामले की जांच की जाएगी। वहीं, सोसायटी वासियों ने आदित्य की लंबी उम्र के लिए महामृत्युंजय का जाप किया।
मालूम हो कि मई में ग्रेटर नोएडा के एक अपार्टमेंट के स्वीमिंग पूल में 2 साल का बच्चा डूबते-डूबते बचा था। इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। जिले के कई अपार्टमेंट में स्वीमिंग पूल चल रहे हैं, लेकिन इनमें से कई जिला प्रशासन से बिना एनओसी के ही चल रहे हैं।
क्या हैं नियम
- स्वीमिंग पूल पर लाइफ गार्ड होना जरूरी है।
- फिल्टर प्लांट होना जरूरी है।
- स्वीमिंग पूल पर कृत्रिम सांस लेने वाले उपकरण और फोटो सहित पूर्ण विवरण लिखा होना चाहिए।
- पूल पर नजदीकी डॉक्टर का नंबर और अस्पताल की दूरी लिखी होनी चाहिए। गहराई बताने वाले चिह्न लिखे होने चाहिए।
- जब तक पानी भरा रहेगा तब तक सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे।
ऐसे मिलती है एनओसी
एनओसी लेने के लिए आवेदनकर्ता को सेक्टर-19 सिटी मजिस्ट्रेट ऑफिस में आकर आवेदन करना पड़ता है। सभी नियम पूरे करने के बाद 10 हजार रुपये फीस लगती है। जिला प्रशासन की टीम स्वीमिंग पूल की जांच करने जाती है। उसके बाद ही एनओसी जारी की जाती है।