यूपी में फिल्म सिटी को लेकर एक्शन में सरकार, अवनीश अवस्थी ने किया प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण
उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण को लेकर शासन पूरी तरह से एक्शन में है। इसे लेकर गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने गौतमबुद्ध नगर फिल्म सिटी के लिए प्रस्तावित भूमि के एक हिस्से का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ यमुना प्रधिकरण के सीईओ और ओएसडी भी मौजूद रहे।
Additional Chief Secretary, Home Department Awanish K Awasthi, inspected a portion of land for the proposed
Filmcity in Gautam Budh Nagar today. CEO and OSD of Yamuna Authority were also present. pic.twitter.com/VnfVlC3Zqq— ANI UP (@ANINewsUP) September 27, 2020विज्ञापन
मालूम हो कि उत्तर प्रदेश सरकार ने यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-21 में 1000 एकड़ में फिल्म सिटी बनाने का एलान किया है। इसका हाल नोएडा की फिल्म सिटी जैसा नहीं हो, इसका खासा ख्याल रखा जा रहा है। यीडा की फिल्म सिटी में प्लॉट लेने वालों पर दो शर्तें लागू होंगी।
पहली यह कि पजेशन मिलने के पांच वर्ष के अंदर प्लॉट पर उद्योग चालू करना होगा। और दूसरी यह कि आवंटी 10 साल तक प्लॉट बेच नहीं सकेंगे। प्लॉट आवंटन के पांच वर्ष के भीतर उद्योग चालू नहीं होने पर यीडा सीईओ अगर चाहें तो आवंटी को एक और वर्ष का वक्त दे सकते हैं, हालांकि इसके लिए आवंटी के पास दी गई अवधि में इंडस्ट्री शुरू नहीं होने की ठोस वजह होनी चाहिए।
अहम है कि यीडा ने हाल ही में ये दो नियम सभी तरह के प्लॉट आवंटन पर लागू किए हैं। यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के मुताबिक दोनों शर्त्तें इसलिए लागू की गई हैं जिससे यहां केवल वही लोग प्लॉट खरीदें जिनको उद्योग चलाना हो। इससे क्षेत्र में निवेश होगा और रोजगार के अवसर पैदा हो सकेंगे।
मालूम हो कि नोएडा की फिल्म सिटी में भूखंडों का आवंटन वर्ष 1988 में शुरू हुआ था। उस समय जिसने प्लॉट मांगा उसी को मिल गया था। नोएडा प्राधिकरण के उस समय के अफसरों ने यहां फिल्म उद्योग लगाने के लिए फिल्मकारों से खुद संपर्क किया था।
कई नामचीन फिल्मकार जैसे पद्मिनी कोल्हापुरी, डैनी डेन्जोंग्पा, सुरेंद्र कपूर (अनिल कपूर के पिता), संदीप मारवाह (अनिल कपूर के जीजा) और गुलशन कुमार ने जमीन खरीदी, लेकिन वर्ष 2000 आते-आते इनमें से कई ने बढ़े दामों पर प्लॉट बेच दिए। अब इस फिल्म सिटी में मीडिया हाउस, फिल्मों से जुड़े इंस्टीट्यूट और कुछ कंपनियों के दफ्तर चल रहे हैं।