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Delhi NCR News: मुंडका में अवैध उद्योग पर कार्रवाई, एक फैक्टरी की मान्यता रद्द
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- डीपीसीसी ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट में दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के मुंडका इलाके में अवैध रूप से चल रही औद्योगिक गतिविधियों के खिलाफ दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कार्रवाई करते हुए एक फैक्टरी की मान्यता रद्द कर दी है। स्थानीय निवासी की शिकायत और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद यह कार्रवाई की गई। डीपीसीसी के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुंडका के कुछ भूखंडों पर कृषि भूमि का उपयोग औद्योगिक कार्यों के लिए किया जा रहा है। यहां भारी लोहे की चादरों की कटाई सहित अन्य गतिविधियां संचालित होने से प्रदूषण फैल रहा था।
शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान एक इकाई में केबल और बिजली के तारों की कटाई का काम चलता मिला। यह भी पाया गया कि फैक्टरी ऐसे क्षेत्र में संचालित हो रही थी, जहां औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। डीपीसीसी ने फैक्टरी संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन तय समय में कोई जवाब नहीं मिला। समिति ने वर्ष 2021 में दी गई उसकी व्हाइट कैटेगरी मान्यता रद्द कर दी। डीपीसीसी का कहना है कि यह मान्यता गलत जानकारी के आधार पर हासिल की गई थी।
निरीक्षण के दौरान परिसर में बोरवेल और सबमर्सिबल पंप भी पाए गए। इस संबंध में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं, भूमि उपयोग और निर्माण नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच के लिए नगर निगम (एमसीडी) को भी पत्र भेजा गया है। डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया कि दिल्ली के गैर-अनुरूप क्षेत्रों में उद्योग चलाने की अनुमति नहीं है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित स्थानीय निकायों की भी होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के मुंडका इलाके में अवैध रूप से चल रही औद्योगिक गतिविधियों के खिलाफ दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कार्रवाई करते हुए एक फैक्टरी की मान्यता रद्द कर दी है। स्थानीय निवासी की शिकायत और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद यह कार्रवाई की गई। डीपीसीसी के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुंडका के कुछ भूखंडों पर कृषि भूमि का उपयोग औद्योगिक कार्यों के लिए किया जा रहा है। यहां भारी लोहे की चादरों की कटाई सहित अन्य गतिविधियां संचालित होने से प्रदूषण फैल रहा था।
शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान एक इकाई में केबल और बिजली के तारों की कटाई का काम चलता मिला। यह भी पाया गया कि फैक्टरी ऐसे क्षेत्र में संचालित हो रही थी, जहां औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। डीपीसीसी ने फैक्टरी संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन तय समय में कोई जवाब नहीं मिला। समिति ने वर्ष 2021 में दी गई उसकी व्हाइट कैटेगरी मान्यता रद्द कर दी। डीपीसीसी का कहना है कि यह मान्यता गलत जानकारी के आधार पर हासिल की गई थी।
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निरीक्षण के दौरान परिसर में बोरवेल और सबमर्सिबल पंप भी पाए गए। इस संबंध में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं, भूमि उपयोग और निर्माण नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच के लिए नगर निगम (एमसीडी) को भी पत्र भेजा गया है। डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया कि दिल्ली के गैर-अनुरूप क्षेत्रों में उद्योग चलाने की अनुमति नहीं है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित स्थानीय निकायों की भी होती है।
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