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'मोदी ने छुआ मुस्लिम बुजुर्ग का पैर, बदल गया मेरा दिल'

Fri, 12 Sep 2014 03:54 PM IST
Updated Fri, 12 Sep 2014 03:54 PM IST
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ABVP introduced muslim candidate in JNU.

मोहम्मद जहीदुल दीवान से जब लोगों ने ये कहा कि एबीवीपी अल्पसंख्यकों के मुद्दे नहीं उठाती तो उन्होंने जवाब दिया कि मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि एबीवीपी मुसलमानों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देती।

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लोगों के लाख समझाने के बाद भी उन्होंने तय किया कि वह अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी की छात्र शाखा एबीवीपी से ही करेंगे।

एबीवीपी ने भी उन्हें निराश नहीं किया और देश के सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जेएनयू के स्टूडेंट इलेक्शन में एबीवीपी का उम्मीदवार बना दिया।

एबीवीपी के इस कदम का विरोध पूरे कैंपस में हो रहा है। अन्य संगठनों का कहना है कि एबीवीपी ने ऐसा जान कर किया है ताकि एक खास समुदाय के वोटों को आकर्षित किया जा सके।
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हालांकि खुद जहीदुल का कहना है कि वह जेएनयू इलेक्शन के चलते एबीवीपी से नहीं जुड़े हैं। वह 2011 से इस संस्था का हिस्सा है।

'मुस्लिम को नहीं मिलेगा चुनाव का टिकट'

ABVP introduced muslim candidate in JNU.

जहीदुल का यह खुलासा भी काफी अहम है कि एबीवीपी में कभी मुझसे नहीं कहा ‌गया कि मुस्लिम होने की वजह से मुझे चुनाव का टिकट नहीं मिलेगा।

29 वर्षीय जहीदुल का कहना है कि एबीवीपी और अल्पसंख्यकों के बारे में लोगों की सोच का कोई ‌तर्कसंगत आधार नहीं है।

कैंपस में भाजपा सरकार की बुराई किए जाने को भी जहीदुल सही नहीं मानते। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी में यह क्षमता है कि वह देश में बदलाव की लहर को हकीकत में बदल सकते हैं।

जहीद का कहना है कि उन्हें राजनीति में बने रहने की प्रेरणा भी मोदी के उस भाषण से मिलती है जिसमें उन्होंने कहा कि वह भारत राष्ट्र का निर्माण करेंगे।

'मोदी के उस व्यवहार ने बदल दिया मेरा दिल'

ABVP introduced muslim candidate in JNU.

चुनाव प्रचार के दौरान मोदी का मुसलमानों से मिलना और एक बुजुर्ग मुस्लिम के पैर छूने की एक घटना ने जहीद के दिल को छू लिया था।

जहीदुल का कहना है कि लोकसभा चुनाव ने यह साबित कर दिया है ‌कि देश के लोग बदलाव चाहते हैं। ऐसी ही लहर उन्हें जेएनयू में भी दिखाई देती है।

जहीदुल की पृष्ठभूमि भी काफी दिलचस्प है। वह आसाम के बरपेटा जिले से हैं जो दंगों से प्रभावित कोकराझार से लगा हुआ है।

2011 में वह एमफिल करने जेएनयू आए। उनका कहना था कि यहां आते ही लोगों ने मुझसे कहा कि बीजेपी सांप्रदायिक पार्टी है। आखिर वह तब कहां थे जब कोकराझार में दंगे हो रहे थे।

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'लेफ्ट पार्टियों ने जेएनयू को पीछे धकेला'

ABVP introduced muslim candidate in JNU.

जहीदुल का कहना है कि देश की असल समस्या कुछ और है लेकिन, राजनीतिक पार्टियां इसे सांप्रदायिक रुप देने पर लगी हुई हैं।

असल में हमें हिंदू-मुसलमान की लड़ाई से ऊपर उठकर देश के बारे में सोचना चाहिए। जेएनयू में लेफ्ट पार्टियों ने सांप्रदायिकता की लड़ाई में राष्ट्रीयता के मुद्दे को ही पीछे धकेल दिया है जिसे पुनर्जीवित करने की जरुरत है।

गौरतलब है कि देशभर के स्टूडेंट्स की निगाह डीयू और जेएनयू के स्टूडेंट इलेक्‍शन पर है जहां आज मतदान चल रहा है।

साभारा: indianexpress.com

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