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Delhi NCR News: जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश, वेस्ट पैसिफिक की गर्मी और पश्चिमी विक्षोभ बने प्रमुख कारण
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-दिल्ली स्थित जलवायु शोध संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा जारी विश्लेषण ने बताया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जुलाई में देशभर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। 1 से 26 जुलाई के बीच 238.2 मिमी वर्षा हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 233.9 मिमी है। यह स्थिति तब सामने आई, जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जुलाई में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जताया था। दिल्ली स्थित जलवायु शोध संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा जारी विश्लेषण के अनुसार, पूरे महीने लगातार सक्रिय रहे मॉनसून सिस्टम सामान्य से अधिक बारिश की मुख्य वजह रहे। विश्लेषण में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन और समुद्र-वायुमंडल के बदलते संबंधों के कारण भारत में मॉनसून का पूर्वानुमान लगाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आईएमडी के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वैज्ञानिक-डी डॉ. अखिल श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भूमि और समुद्र के तापमान में वृद्धि हुई है। ऐसे में जब अनुकूल मॉनसून सिस्टम बनते हैं तो वे अधिक नमी ग्रहण करते हैं, जिससे अत्यधिक वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।
आईएमडी के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे रमेश ने बताया कि इस बार सामान्य से अधिक बारिश के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला, पश्चिमी प्रशांत महासागर का गर्म होना, जिसने अल-नीनो के मॉनसून पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया। म्यांमार से होकर आए साइक्लोनिक सर्कुलेशन के अवशेष उत्तर बंगाल की खाड़ी में दोबारा सक्रिय हुए, जिससे मॉनसून मजबूत हुआ और देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई। दूसरा कारण मॉनसून सीजन के दौरान वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की बढ़ी सक्रियता रही। इसके कारण अरब सागर से अधिक नमी आई, जिससे महाराष्ट्र, गुजरात, पूर्वी हिमालय और असम सहित कई क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ जैसी स्थिति बनी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जुलाई में देशभर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। 1 से 26 जुलाई के बीच 238.2 मिमी वर्षा हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 233.9 मिमी है। यह स्थिति तब सामने आई, जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जुलाई में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जताया था। दिल्ली स्थित जलवायु शोध संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा जारी विश्लेषण के अनुसार, पूरे महीने लगातार सक्रिय रहे मॉनसून सिस्टम सामान्य से अधिक बारिश की मुख्य वजह रहे। विश्लेषण में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन और समुद्र-वायुमंडल के बदलते संबंधों के कारण भारत में मॉनसून का पूर्वानुमान लगाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आईएमडी के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वैज्ञानिक-डी डॉ. अखिल श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भूमि और समुद्र के तापमान में वृद्धि हुई है। ऐसे में जब अनुकूल मॉनसून सिस्टम बनते हैं तो वे अधिक नमी ग्रहण करते हैं, जिससे अत्यधिक वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।
आईएमडी के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे रमेश ने बताया कि इस बार सामान्य से अधिक बारिश के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला, पश्चिमी प्रशांत महासागर का गर्म होना, जिसने अल-नीनो के मॉनसून पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया। म्यांमार से होकर आए साइक्लोनिक सर्कुलेशन के अवशेष उत्तर बंगाल की खाड़ी में दोबारा सक्रिय हुए, जिससे मॉनसून मजबूत हुआ और देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई। दूसरा कारण मॉनसून सीजन के दौरान वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की बढ़ी सक्रियता रही। इसके कारण अरब सागर से अधिक नमी आई, जिससे महाराष्ट्र, गुजरात, पूर्वी हिमालय और असम सहित कई क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ जैसी स्थिति बनी।
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