'आप' के लोकपाल की चिट्ठी सार्वजनिक, उठाए गंभीर सवाल
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दिल्ली में ऐतिहासिक जीत के बाद सत्ता में आने के बाद से ही आम आदमी पार्टी में मतभेद और टूट के लक्षण दिखने लगे हैं। आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आप के वरिष्ठ नेता और पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्य योगेंद्र यादव को पार्टी को निकाले जाने की खबरों के बीच पार्टी के आंतरिक लोकपाल व पूर्व एडमिरल एल रामदास की चिट्ठी से एक नया विवाद पैदा हो गया है।
एल रामदास की चिट्ठी ने पार्टी में चल रहे आंतरिक कलह को सतह पर ला दिया है। रामदास ने पार्टी में अनुशासनहीनता से लेकर गोपनियता और पद के लिए हो रही मारामारी सभी पर निशाना साधते हुए एक खत लिखा है जो मीडिया में आ गया है।
रामदास ने अपने खत में लिखा है कि पार्टी में गोपनियता का बिलकुल भी खयाल नहीं रखा जा रहा है। दिल्ली में मंत्रियों के शपथ लेने से पहले ही मीडिया में सारे मंत्रियों के नाम और उनके विभागों का खुलासा हो जाने पर रामदास ने अपना गुस्सा जाहिर किया है।
महिलाओं की भागीदारी पर उठाए सवाल
इसके साथ ही रामदास ने एक व्यक्ति एक पद की बात पर अपनी राय जाहिर करते हुए सवाल खड़ा किया है कि ऐसे में जब पार्टी के सबसे बड़े नेता ही मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं तो जरूरी है कि पार्टी संयोजक का पद भी वहीं संभाले?
इसके साथ ही रामदास ने पार्टी में महिलाओं की हिस्सेदारी पर भी सवाल खड़ा किया है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए लिखा है कि ऐसे में जब हम महिला सुरक्षा पर इतनी बात कर रहे हैं तो उन्हें सरकार और पार्टी में पर्याप्त जगह न मिलना चिंताजनक है।
उन्होंने पार्टी के विस्तार पर भी अपनी राय जाहिर की है। रामदास ने कहा कि पार्टी को मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद इसका विस्तार किया जाना चाहिए और बड़ी जिम्मेदारी की तरफ भी कदम बढ़ाया जाना चाहिए।
दो धड़ों में बंट सकती है पार्टी!
एक न्यूज चैनल को मिले रामदास के ईमेल में लिखा है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच संवादहीनता की स्थिती पैदा हो गई है। नेताओं के बीच विश्वास में आई कमी की वजह से पार्टी दो धड़ो में बंट गई है।
चिट्ठी में लिखा गया है कि आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक प्रशांत भूषण ने दिल्ली चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के चुनाव और पार्टी के निर्णय लेने के तरीकों को पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
रामदास के मुताबिक प्रशांत भूषण ने पार्टी छोड़ने और अपने गुस्से को सार्वजनिक करने की धमकी तक दे दी थी। रामदास ने पार्टी में अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि क्या किसी राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए इतनी बड़ी पार्टी के संयोजक पद की जिम्मेदारियों को एक साथ निभाया जा सकता है।