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अब नए राह पर चल पड़ी है 'आप'

Thu, 05 Mar 2015 11:30 AM IST
Updated Thu, 05 Mar 2015 11:30 AM IST
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AAP is changing its way after delhi election

आम आदमी पार्टी आज आंदोलन से बाहर निकलकर एक सधे हुए राजनीतिक दल की तरह संगठन की राह पर चल पड़ी है। हर बात का निर्णय जनता के बीच रेफरेंडम के तरीके से लेने वाली या सोचने वाली आप में पार्टी के संस्थापक सदस्यों प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव की छुट्टी पीएसी से किए जाने से इसके साफ संकेत मिल रहे हैं।

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पार्टी का यह कठोर निर्णय उसे फायदा पहुंचता है या नहीं यह तो समय ही बताएगा लेकिन सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने वाले अरविंद केजरीवाल आगे बढ़ने को ऐसे निर्णय जरूरी मान रहे हैं।
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दरअसल, पार्टी के भीतर दोनों बुद्धिजीवी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव का कद कभी छोटा नहीं था। कोर्ट में पीआईएल व आरटीआई के माध्यम से कई मामलों में केंद्र व राज्य सरकारों को प्रशांत के माध्यम से घेरा गया और केजरीवाल व आप को इससे समय-समय पर जबर्दस्त लोकप्रियता मिली।
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भूषण परिवार की पार्टी के गठन के समय बड़ी फंडिंग व समय-समय पर मदद देने की बात भी किसी से छुपी नहीं है। इसी तरह से चुनाव में सर्वे कराने से लेकर पार्टी का संविधान निर्माण करने में योगेंद्र यादव हर समय साथ रहे।

केजरीवाल के खिलाफ सोचना भी भारी पड़ेगा

AAP is changing its way after delhi election

राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) में शामिल इन दोनों नेताओं को चिट्ठी लीक मामले में छुट्टी कराने पर आमादा पार्टी के अगली पंक्ति के कुछ अन्य नेताओं के बयानों से साफ लग रहा था कि इस पार्टी में केजरीवाल के खिलाफ में मन में सोचना भी भारी पड़ेगा।

इन दो नेताआें को पीएसी से हटाने में पार्टी के भीतर ऐसी स्थिति भी दिख रही थी जैसे व्यक्ति को शरीर के अंग काटने को कहा जा रहा हो। पीएसी की बैठक के दौरान बाहर जमा सैकड़ों लोग ऐसे फोटो लेकर आए थे जिसमें प्रशांत, अरविंद, योगेंद्र व मनीष चर्चा कर रहे थे।

पोस्टराें के माध्यम से यह लोग पार्टी ने तोड़ने की मार्मिक अपील कर रहे थे। इसके अलावा 19 में से कुल 8 सदस्य प्रशांत व योगेंद्र के पक्ष में रहे। इससे पूर्व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जन्मी आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2013 के चुनाव के बाद सरकार बनाई तो भी वह आंदोलन की तरह ही सरकार चलाती दिखी।

दोनों को इस्तीफे के लिए मनाने की कोशिश भी हुई

AAP is changing its way after delhi election
यहां तक की सरकार छोड़ने पर भी जनता के बीच रेफररेंडम कराया गया। आप की सरकार बनने के बाद भी विनोद बिन्नी, अश्वनी उपाध्याय, अशोक अग्रवाल, शाजिया इल्मी सहित कई पुराने साथी केजरीवाल पर अपनी ही चलाने का आरोप लगाते हुए अलग हुए थे लेकिन उन्हें अलग करने का तरीका अलग था। इस चुनाव के प्रचार भी आंदोलन सरीखे जैसा ही था।

पीएसी में पहली बार दो वरिष्ठ नेताओं की छुट्टी कराने को मतदान की जरूरत पड़ी। प्रशांत व योगेंद्र के पक्ष में पड़े मतों से स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर विरोध की सुगबुगाहट है।

पार्टी के भीतर विरोधियाें की लकीर बड़ी खींच जाने व उससे निपटने के तरीके से स्पष्ट है कि केजरीवाल अब इस पार्टी को आंदोलन नहीं बल्कि संगठन की तरह से चलाना चाहते हैं।

इसी तरह आंदोलन की तरह नहीं बल्कि अब संगठन की तरह ही लोगों को पार्टी में लिया जाएगा। दोनों को आगे पार्टी में क्या स्पेस मिलता है और इनका क्या निर्णय होता है यह देखना होगा।

आप की राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक में योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण से स्वयं इस्तीफा देने को भी कहा गया। पार्टी सूत्राें के अनुसार कुमार विश्वास ने इनसे अलग-अलग बातचीत भी की।

योगेंद्र को स्वयं इस्तीफा देने पर महाराष्ट्र व किसान सेल का प्रभारी बनाने की बात कही गई। इसी तरह से प्रशांत भूषण को लीगल सेल का प्रभारी बनाने का कहा गया। जिसे दोनों ने ही नामंजूर कर दिया।
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