सिख दंगा मामले में केंद्र पर गंभीर आरोप
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आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इस बार हमला सिख दंगों पर एसआईटी गठित करने की संभावना तलाशने के लिए बनी कमेटी के सहारे किया है। पार्टी का कहना है कि इससे केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठता है। केंद्र में सरकार बनने से पहले भाजपा व अकाली दल सिख दंगों पर एसआईटी बनाने का दावा कर रहे थे। लेकिन सरकार बनने के बाद संभावना तलाशी जा रही है।
आप नेता एचएच फुलका ने बुधवार को मीडिया से कहा कि बीते फरवरी माह में आप की सरकार ने एसआईटी गठित करने की सिफारिश की थी। पहले यूपीए व उसके बाद एनडीए सरकार ने लटका रखा था। दबाव बनाने के बाद केंद्र सरकार समिति के सहारे देरी करने की कोशिश कर रही है।
जबकि 2013 में जंतर-मंतर पर भाजपा और अकाली दल ने एसआईटी का समर्थन किया था। फुलका के मुताबिक, कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की दो दशक पहले चार्जशीट को अभी तक अदालत में दाखिल नहीं किया गया।
जगदीश टाइटलर का मामला सीबीआई के पास पड़ा हुआ है। उन्होंने आशंका जताई कि भले समिति को तीन महीने में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया हो लेकिन इसकी सिफारिश में लंबा समय लगेगा। इस बीच सरकार अपनी जिम्मेदारी से बची रहेगी। गठित समिति पर आप नेता आशुतोष का कहना है कि चुनाव से पहले समिति बनाने से केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठता है। फिर, आप सरकार की तरफ से एसआईटी गठित करने के लिए एलान के बाद नई समिति का औचित्य समझ से परे है।
जगदीश टाइटलर को सीबीआई ने फिर दी क्लीन चिट
पुल बंगश इलाके में 1984 के दंगों के दौरान तीन सिखों की हत्या के मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को एक बार फिर राहत मिली है। सीबीआई ने टाइटलर को क्लीन चिट देते हुए बुधवार को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट पर 17 जनवरी को सुनवाई होगी।
सीबीआई ने बुधवार को कड़कड़डूमा जिला अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की। एजेंसी ने कहा है कि टाइटलर पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और शिकायकर्ता लोकेंदर कौर ने भी जांच में सहयोग नहीं दिया। याची ने उन गवाहों के बारे में कुछ नहीं बताया, जिनके नाम उसने पुनर्विचार याचिका में दिए थे।
एजेंसी ने जांच के दौरान पूर्व दिल्ली पुलिस आयुक्त गौतम कौल, अमिताभ बच्चन व पत्रकार मजूमदार के बयान दर्ज करने की बात कही है। एजेंसी का दावा है कि इन गवाहों के बयानों के मद्देनजर यह नहीं कहा जा सकता कि जगदीश दंगों के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की शोक सभा में नहीं थे।
बता दें कि सत्र अदालत ने इस मामले में सीबीआई की क्लीन चिट और मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने वाले आदेश को दस अप्रैल 2013 को खारिज कर आगे जांच करने व पीड़ित पक्ष द्वारा उपलब्ध करवाए गए गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था।