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आम आदमी पार्टी ने ऑडिट रिपोर्ट के हवाले से भाजपा शासित दक्षिण दिल्ली नगर निगम पर हमला बोला
Sun, 01 Sep 2019 02:31 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 01 Sep 2019 02:31 AM IST
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सौरभ भारद्वाज
- फोटो : अमर उजाला
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आम आदमी पार्टी (आप) ने ऑडिट रिपोर्ट के हवाले से भाजपा शासित दक्षिण दिल्ली नगर निगम पर हमला बोला है। पार्टी ने दक्षिणी एमसीडी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत करने की बात कही है। पार्टी की मांग है कि मामले की जांच कर माकूल कार्रवाई की जाए।
पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए आप विधायक व प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट स्टैंडिंग कमेटी के अंदर रखी गई। इसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का एक भी विभाग ऐसा नहीं है, जिसमें करोड़ों का भ्रष्टाचार न हुआ हो।
भारद्वाज ने बताया कि एमसीडी के पास 1,177 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स अभी बकाया पड़ा है। लेकिन एमसीडी ने इस पैसे को वसूलने की जहमत नहीं उठाई। व्यावसायिक संपत्तियों का टैक्स वसूलने में ढेरों अनियमितताएं पाई गई हैं। आरोप लगाया कि एमसीडी के अधिकारियों व भाजपा नेताओं की मिलीभगत से फार्म हाउस को खेती की जमीन दिखाकर टैक्स लिया गया है। सिर्फ चार प्रापर्टी पर चार करोड़ 49 लाख 99 हजार 422 रुपये बनते हैं।
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सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रिपोर्ट में सिर्फ एमसीडी की 147 यूनिट की इंटरनल ऑडिट की गई है। यह एमसीडी की सभी यूनिट का सिर्फ चार फीसदी है। जबकि कानून ऑडिट 100 फीसदी का होना चाहिए। भारद्वाज के मुताबिक, दिल्ली में लगे ज्यादातर सेल फोन टावर गैरकानूनी हैं।
टावर लगाने के लिए एमसीडी की निर्धारित फीस एक लाख रुपये हैं। कानूनी दायरे में भी जो टावर लगे हुए हैं उनसे भी एमसीडी ने वह फीस नहीं ली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1672 लोगों ने सेल फोन टावर के आवेदन दिए, इसमें से मात्र 659 लोगों को इजाजत मिली। लेकिन चौंकाने वाली बात है कि बाकी टावर बगैर अनुमति के चल रहे हैं।
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पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए आप विधायक व प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट स्टैंडिंग कमेटी के अंदर रखी गई। इसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का एक भी विभाग ऐसा नहीं है, जिसमें करोड़ों का भ्रष्टाचार न हुआ हो।
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भारद्वाज ने बताया कि एमसीडी के पास 1,177 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स अभी बकाया पड़ा है। लेकिन एमसीडी ने इस पैसे को वसूलने की जहमत नहीं उठाई। व्यावसायिक संपत्तियों का टैक्स वसूलने में ढेरों अनियमितताएं पाई गई हैं। आरोप लगाया कि एमसीडी के अधिकारियों व भाजपा नेताओं की मिलीभगत से फार्म हाउस को खेती की जमीन दिखाकर टैक्स लिया गया है। सिर्फ चार प्रापर्टी पर चार करोड़ 49 लाख 99 हजार 422 रुपये बनते हैं।
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सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रिपोर्ट में सिर्फ एमसीडी की 147 यूनिट की इंटरनल ऑडिट की गई है। यह एमसीडी की सभी यूनिट का सिर्फ चार फीसदी है। जबकि कानून ऑडिट 100 फीसदी का होना चाहिए। भारद्वाज के मुताबिक, दिल्ली में लगे ज्यादातर सेल फोन टावर गैरकानूनी हैं।
टावर लगाने के लिए एमसीडी की निर्धारित फीस एक लाख रुपये हैं। कानूनी दायरे में भी जो टावर लगे हुए हैं उनसे भी एमसीडी ने वह फीस नहीं ली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1672 लोगों ने सेल फोन टावर के आवेदन दिए, इसमें से मात्र 659 लोगों को इजाजत मिली। लेकिन चौंकाने वाली बात है कि बाकी टावर बगैर अनुमति के चल रहे हैं।