पुलिस में दर्ज सभी केस की जानकारी दें 22 'आप' विधायक
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अपने दो दागी विधायकों के हाथों किरकिरी झेलने के बाद आम आदमी पार्टी अब सतर्क हो चुकी है। पार्टी ने अपने विधायकों से कहा है कि अगर उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है या किसी ममाले में चार्जशीट दाखिल है तो उसकी जानकारी तुरंत पार्टी को दें।
आम आदमी पार्टी ने अपने दो विधायकों के खिलाफ हुई पुलिस कार्यवाही के बाद कदम उठाया है। बता दें कि आप के कानून मंत्री रह चुके जितेंद्र सिंह तोमर अपनी फर्जी डिग्री के मामले में फिलहाल जेल में हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने विधायक तोमर के बचाव की कोशिश में कोई कसर नही छोड़ी थी। लेकिन उनके खिलाफ पुलिस ने जब सबूत दिखाये तो उन्हे शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।
पार्टी खुद करेगी खिलाफ
इसी तरह कोंडली से आप विधायक मनोज कुमार भी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। उन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त का आरोप है।
पार्टी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हालांकि उनके पास सभी विधायकों के बारे में अधिकतर जानकारी है लेकिन इस दौरान अगर किसी भी विधायक के खिलाफ कोई एफआइआर दर्ज हुई हो तो उसकी जानकारी पार्टी को देनी चाहिए।
उनका कहना है कि अगर पार्टी के किसी विधायक के बारे में किसी भी तरह का कोई गंभीर मामला सामने आता है तो पार्टी उनके खिलाफ स्वयं कार्रवाई करेगी।
दो विधायकों पर है पार्टी की खास नजर
फिलहाल चर्चा में रहने वाले आप के विधायक कमांडो सुरिंदर सिंह और अखिलेशपति त्रिपाठी से इस बारे में विशेषतौर से जानकारी मांगी गई है।
आप पार्टी के एक विधायक का कहना है कि चुनावी हलफनामे में विधायक केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देते हैं जिनमें उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी होती है।
अक्सर इसमें विधायक पर लगाए गए सभी आरोपों की जानकारी नहीं होती। दो मामलों में शर्मिंदगी झेलने के बाद पार्टी ने तय किया है कि जिन विधायकों से संबंधित मामले खुल चुके हैं उनकी जांच की जाए।
22 विधायकों से मांगा जवाब
पार्टी का कहना है कि कुमार विश्वास के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर का मकसद उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना था। जबकि इसका कोई ठोस आधार नहीं था।
जबकि किसी मामले में चार्जशीट दायर होने का मतलब है कि पुलिस के पास उस मामले की जांच करने के आधारा मौजूद हैं। ऐसे में हमने उन 22 विधायकों से जवाब मांगा है जिन पर हाल में कोई आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया को आगे सभी विधायकों पर लागू किया जा सकता है।