Delhi News: सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर आप व उपराज्यपाल में ठनी, विधायक आतिशी ने लगाया आरोप
आतिशी का आरोप है कि नए उपराज्यपाल ने दिल्ली की सांविधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश की है। आतिशी ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नसीहत दी है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर काम करें।
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सरकारी वकीलों की नियुक्ति के मामले में भी आम आदमी पार्टी (आप) और उपराज्यपाल आमने-सामने हैं। आप विधायक आतिशी का आरोप है कि तत्कालीन उपराज्यपाल से मंजूर की गई सरकारी वकील और स्थायी परामर्शदाता की नियुक्ति प्रक्रिया को नए उपराज्यपाल ने रोक दिया है। आतिशी ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नसीहत दी है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर काम करें।
आतिशी का आरोप है कि नए उपराज्यपाल ने दिल्ली की सांविधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश की है। दिल्ली में जमीन, कानून व्यवस्था व दिल्ली पुलिस सीधे उनके अधीन आते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, कानून विभाग सहित तमाम विभागों के लिए कैबिनेट की सलाह जरूरी है। आतिशी का आरोप है कि इसके उलट वह ऐसे कदम उठा रहे हैं जिसका दिल्ली की सांविधानिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। ताजा मामले के तौर पर उन्होंने सरकारी वकीलों की नियुक्ति का हवाला दिया है।
आतिशी ने बताया कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति प्रक्रिया 2021 में शुरू हुई थी। तत्कालीन उपराज्यपाल को सरकार ने फाइल भेजी और उन्होंने इस पर अपनी स्वीकृति भी दे दी। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी गठित की, जिसे तत्कालीन उपराज्यपाल ने 24 जून 2021 को मंजूरी दे दी थी। अतिरिक्त स्थायी परामर्शदाता, स्थायी परामर्शदाता और सरकारी वकील के लिए जो 2000 आवेदन आए थे, कमेटी ने उनका साक्षात्कार लिया। इसमें से चयनित लोगों की अंतिम सूची दिल्ली उच्च न्यायालय को भेज दी।
आतिशी के मुताबिक, इस सूची को 40 जजों ने तीन बार देखा। चार आवेदकों को छोड़ सभी के नाम पर स्वीकृति दे दी। दिल्ली सरकार के पास चयनित पदों के लिए नाम वापस भेजे गए। जब दिल्ली सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करने से पहले उपराज्यपाल को सूचित करने के लिए फाइल भेजी तो उन्होंने सभी चयनित सरकारी वकीलों और स्थायी परामर्शदाताओं का बायोडाटा भेजने को कहा। साथ ही कहा कि इन्हें देखने के बाद फैसला करूंगा कि कौन अतिरिक्त स्थायी परामर्शदाता, स्थायी परामर्शदाता और सरकारी वकील हो सकते हैं।
उपराज्यपाल कार्यालय ने आपत्ति जताते हुए कहा-प्रस्ताव विचाराधीन
स्थायी वकील, अतिरिक्त स्थायी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के पैनल से संबंधित प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया पर उप राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने पार्टी की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों को तुच्छ और तथ्यों से परे और जानबूझकर गुमराह करने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला विचाराधीन है और ऐसे मामलों में विभिन्न पहलुओं पर मंथन में प्रक्रियात्मक समय लग रहा है। स्थायी वकील, अतिरिक्त स्थायी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के पैनल से संबंधित प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता व विधायक आतिशी ने सवाल उठाते हुए उप राज्यपाल पर निशाना साधा था।
उन्होंने उच्च न्यायालय की वैधानिक सहमति का हवाला देते हुए नियुक्तियों को बेवजह अटकाने का आरोप लगाया था। सूत्रों के मुताबिक विधि मंत्री, दिल्ली सरकार की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से अनुशंसित 44 स्थायी अधिवक्ताओं, अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ताओं और अतिरिक्त लोक अभियोजकों के पैनल के प्रस्ताव को तत्कालीन उपराज्यपाल के समक्ष रखा गया था। उन्हें वैधानिक रूप से सहमति के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय को भेजा गया था। उच्च न्यायालय ने तीन जून, 2022 को चार आवेदकों के नामों को खारिज करते हुए केवल 40 नामों के लिए अपनी सहमति दी थी और दिल्ली सरकार को अवगत कराया।