दिल्ली में केजरीवाल को सभा करने से रोका गया, हड़कंप
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दिल्ली के द्वारका जिला अदालत के निमंत्रण पर आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल वकीलों के साथ बैठक करने गए थे लेकिन इस कार्यक्रम को कोर्ट प्रशासन ने रुकवा दिया। इसके विरोध में वकीलों ने शनिवार को हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है।
जानकारी के मुताबिक वकीलों के बुलावे पर केजरीवाल उनकी समस्याएं जानने गए थे। जब यह कार्यक्रम कोर्ट परिसर में चल रहा था तो कोर्ट प्रशासन के निर्देश पर इसे रुकवा दिया गया। इसके बाद यह कार्यक्रम बार कार्यालय में पूरा किया गया।
द्वारका बार एसोसिएशन के मुताबिक इस तरह के कार्यक्रम भाजपा ने भी चुनावों से पहले आयोजित किए थे। वकीलों का कहना है कि दिल्ली विधान सभा चुनाव के मद्देनजर वकील हर पार्टी के नेताओं को बुलाने वाले थे।
बार अध्यक्ष दिनेश मुद्गिल ने बताया कि वकीलों ने इस कार्यक्रम के लिये पहले से ही होर्डिंग लगा दिए थे तब किसी ने आपत्ति नहीं की लेकिन जब कार्यक्रम हुआ तो उसे बीच में रुकवा दिया गया।
वकीलों से मुलाकात के दौरान केजरीवाल ने उनकी समस्याओं को सुना। वकीलों ने द्वारका कोर्ट से करीब डेढ़ दर्जन थाने ट्रांसफर करने का मुद्दा रखा। केजरीवाल ने कहा कि अगर वह मुख्यमंत्री बनते हैं तो इन थानों को वापस द्वारका जिला अदालत में लाएंगे।
आप ने लगाया आरोप
आप ने लगाया आरोप
‘आप’ का आरोप है कि दोनों नेताओं ने संसद की अवमानना भी की है। राज्य सभा के कार्य संचालन व प्रक्रिया संबंधी नियमों से साफ है कि रविशंकर प्रसाद को किसी भी चर्चा में हिस्सा लेने से पहले अपने आर्थिक हितों को राज्य सभा के रजिस्टर में दर्ज करना था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
दूसरी तरफ मनीष तिवारी ने जेपीसी के अध्यक्ष पीसी चाको को जानकारी दी थी कि 2005 से उनका किसी टेलीकॉम कंपनी से ताल्लुक नहीं है। जबकि वह रिलायंस से जुड़े थे। इस मामले में उन्होंने झूठ बोला है।
‘आप’ के सवाल:
- दोनों नेताओं का बताना चाहिए कि कंपनी से इन्होंने कितनी राशि कब से कब तक ली?
- रविशंकर प्रसाद दूर संचार विभाग द्वारा 4जी मामले में रिलायंस जियो को भेजे जाने वाले नोटिस को लेकर मौन हैं?
दोनों नेताओं की सफाई पर ही आप का वार
आम आदमी पार्टी (आप) ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और यूपीए सरकार में मंत्री मनीष तिवारी पर हमला बोला है। ‘आप’ ने बृहस्पतिवार के अपने खुलासे पर दोनों नेताओं की तरफ से आई सफाई को आधार बनाया है। ‘आप’ का कहना है कि दोनों नेताओं ने ‘आप’ के दस्तावेजों को खारिज नहीं किया है। इससे अंदरखाने की गड़बड़ी साफ नजर आती है। इसके आधार पर ‘आप’ ने प्रसाद से इस्तीफा मांगा है।
‘आप’ नेता योगेंद्र यादव का कहना है कि बृहस्पतिवार के खुलासे के बाद रिलायंस के साथ ही दोनों नेताओं ने माना कि उन्होंने फाइन टेक कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड से रकम ली थी। वहीं, रिलायंस ने भी भुगतान की बात स्वीकारी है। ‘आप’ का आरोप है कि प्रसाद ने कंपनी से अप्रैल 2013-मार्च 2014 तक सात लाख और तिवारी ने 2011-2012 में पांच लाख मासिक लिए।
वहीं, प्रसाद का दावा है कि उन्होंने रिलायंस से पैसे नहीं लिए। फाइन टेक कॉरपोेरेशन एक स्वतंत्र उपक्रम है। जबकि योगेंद्र बताते हैं कि फाइन टेक रिलायंस समूह की कंपनी है। इसके स्वामित्व का बड़ा हिस्सा (69 फीसदी) रिलायंस की अनुषंगी कंपनियों के पास है।
बता दें कि बृहस्पतिवार को प्रसाद और पूर्व तिवारी द्वारा निजी लाभ के लिए बरती गई अनियमितताओं को लेकर कुछ दस्तावेज जारी किए थे। इसके आधार पर ‘आप’ ने आरोप लगाया था कि ओहदे का फायदा उठाते हुए दोनों ने रिलायंस को फायदा पहुंचाया।