हर बार केजरीवाल के साथ क्यों होता है ये पंगा?
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दिल्ली की सत्ता छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल विरोधियों के निशाने पर तो लगातार रहे हैं लेकिन उनके 'अपनों' ने भी उन्हें नहीं बख्शा।
केजरीवाल के लिए यह संकट की घड़ी है जब पार्टी के संस्थापक सदस्य और अनुभवी नेता शांति भूषण ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता के इस बयान के बाद दिल्ली की राजनीति और 'आप' में एक नया भूचाल आ गया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर जब-जब पार्टी संभलने और ऊपर उठने की कोशिश करती है, फिर कोई बड़ा हमला हो जाता है। बाहरी हमलों से आहत 'आप' विरोधियों को जवाब देने के लिए खुद को तैयार करती है कि पार्टी के अंदर से ही कोई न कोई हावी हो जाता है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए, कब-कब आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ही केजरीवाल पर हमला बोला और पार्टी की नीतियों को गलत करार दिया।
'वन मैन' कल्चर से परेशान थे योगेंद्र
'आप' के थिंक टैंक कहे जाने वाले योगेंद्र यादव ने भी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था आम आदमी पार्टी में 'वन मैन' कल्चर बढ़ता जा रहा है जो पार्टी के भविष्य के लिए ठीक नहीं है।
पार्टी के अंदर बढ़े गतिरोध से नाराज होकर वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया।
योगेंद्र यादव के इस कदम से पहले मनीष सिसोदिया ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक चिट्ठी लिखी थी जिससे काफी हंगामा हुआ था। बाद में केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा था कि योगेंद्र यादव उनके भाई हैं और वह उन्हें थप्पड़ भी मार सकते हैं।
केजरी पर आरोप लगाकर शाजिया ने तोड़ा था नाता
लोकसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी में एक नया भूचाल आया और एक के बाद एक कई नेताओं ने पार्टी को अलविदा कह दिया। पार्टी में चले इस्तीफे के दौर के बीच सबसे ज्यादा निशाने पर रहे पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल।
चुनाव में करारी हार के लिए अरविंद केजरीवाल को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। 'आप' नेताओं ने ही आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल हमेशा कुछ लोगों की सुनते हैं और देशभर में चुनाव लड़ने का फैसला भी आम सहमति से नहीं लिया गया।
चुनाव के बाद आप को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी का चर्चित चेहरा और गाजियाबाद सीट से चुनाव लड़ने वाली शाजिया इल्मी ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने कहा था कि केजरीवाल से मिलने के लिए उन्हें भी इंतजार करना पड़ता है, पार्टी में उनकी सुनी नहीं जाती और चंद लोगों की राय पर सभी फैसले ले लिए जाते हैं। शाजिया ने भी 'आप' में लोकतंत्र न होने का मुद्दा उठाया था।
गोपीनाथ को नहीं भाई केजरी की 'जेल राजनीति'
आम आदमी पार्टी के नेता जीआर गोपीनाथ ने भी लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने मानहानि मामले में केजरीवाल के जेल जाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह ठीक नहीं है। 'जेल राजनीति' से जनता और पार्टी दोनों का नुकसान होगा।
गोपीनाथ ने पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने भी आरोप लगाया था कि पार्टी में एक खास गुट बन गया है जो सारे फैसले खुद ही ले लेता है और बाद में फैसला दूसरे सदस्यों पर थोप दिया जाता है।
गोपीनाथ ने शाजिया इल्मी के साथ ही पार्टी को अलविदा कहा था। हालांकि बाद में केजरीवाल ने शाजिया को वापस लाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। अब शाजिया के कांग्रेस में शामिल होने के संकेत मिले हैं।
सबसे पहले बिन्नी ने खोला था मोर्चा
आम आदमी पार्टी के अंदर चल रही इस खींचतान और लड़ाई की शुरूआत सबसे पहले दिल्ली से हुई थी। जब पार्टी के विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने दिल्ली सरकार में मंत्री पद न दिये जाने से नाराज होकर बागी रुख अपनाया था।
हालांकि मंत्री पद न देने का मुद्दा काफी दिनों तक छाया रहा और बाद में बिन्नी ने लोकसभा का टिकट मांगते हुए फिर बवाल काटा था। आम आदमी पार्टी ने जब टिकट देने से मना किया तो बिन्नी ने पार्टी से बगावत कर दी।
बिन्नी के बागी रुख देखकर पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। बिन्नी ने भी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र न होने की बात कही थी।
इन चेहरों ने भी पार्टी को कहा अलविदा
लोकसभा चुनाव से पहले आप की सदस्य रहीं मधु भादुड़ी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अश्वनी उपाध्याय ने भी ऐसे ही आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी।
जानी मानी नृत्यांगना मल्लिका साराभाई ने भी आंतरिक लोकतंत्र और पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाते हुए दूरी बना ली।
चुनाव से ठीक पहले आप को मिले ये झटके उसके लिए मुसीबत भी बने। पार्टी के फैसलों पर लगातार सवाल उठने से जनता के मन में भी गलत संदेश गया और उसका नुकसान पार्टी को चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
चुनाव के बाद पार्टी के दिग्गजों ने तो साथ छोड़ा ही, कई स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी से किनारा कर लिया।