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इस धार्मिक मान्यता ने रोक दी मार्केट की रफ्तार!
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Mon, 06 Jan 2014 04:35 PM IST
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मलमास ने बाजार से रौनक गायब कर दी है। इसके अलावा इस बार शुभ कार्य मकर संक्रांति के चार दिन बाद शुरू होने की वजह से भी दुकानदार चिंतित हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार मलमास में कोई भी शुभ काम नहीं होता। मलमास 15 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी तक चलता है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
ज्योतिष रमाशंकर बताते हैं कि इस बार नौ जनवरी से शुक्र तारा अस्त हो रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति के साथ शुभ कार्य शुरू नहीं हो पाएंगे।
विवाह-शादियों और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए 18 जनवरी से शुभ योग बनेगा। इसके बाद जुलाई तक शुभ मुहूर्त की भरमार रहेगी। पंडित शिवकुमार ने बताया कि दस मार्च तक 50 से अधिक शुभ मुहूर्त आएंगे।
इसके बाद होलाष्टक प्रारंभ होने से शुभ कार्य बंद हो जाएंगे, लेकिन 17 अप्रैल से दोबारा समय शुभ योग में आ जाएगा।
कारोबार बेहद मंदा
मलमास का असर कारोबार पर भी पड़ता है। रही सही कसर सर्दी पूरी कर रही है। कपड़ा व्यवसायी हरीश मित्तल बताते हैं कि सर्दी के कारण बहुत कम ग्राहक पहुंच रहे हैं।
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कारोबार में 60 फीसदी कमी आ गई है। अब विवाह-शादियों का सीजन शुरू होने के बाद ही घाटे से उबरने की उम्मीद है। बर्तन बाजार, इलेक्ट्रानिक्स और घरेलू सामान सहित शादी-विवाह के कारोबारियों का भी कमोबेश यही हाल है।
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ज्योतिषियों के अनुसार मलमास में कोई भी शुभ काम नहीं होता। मलमास 15 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी तक चलता है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
ज्योतिष रमाशंकर बताते हैं कि इस बार नौ जनवरी से शुक्र तारा अस्त हो रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति के साथ शुभ कार्य शुरू नहीं हो पाएंगे।
विवाह-शादियों और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए 18 जनवरी से शुभ योग बनेगा। इसके बाद जुलाई तक शुभ मुहूर्त की भरमार रहेगी। पंडित शिवकुमार ने बताया कि दस मार्च तक 50 से अधिक शुभ मुहूर्त आएंगे।
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इसके बाद होलाष्टक प्रारंभ होने से शुभ कार्य बंद हो जाएंगे, लेकिन 17 अप्रैल से दोबारा समय शुभ योग में आ जाएगा।
कारोबार बेहद मंदा
मलमास का असर कारोबार पर भी पड़ता है। रही सही कसर सर्दी पूरी कर रही है। कपड़ा व्यवसायी हरीश मित्तल बताते हैं कि सर्दी के कारण बहुत कम ग्राहक पहुंच रहे हैं।
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कारोबार में 60 फीसदी कमी आ गई है। अब विवाह-शादियों का सीजन शुरू होने के बाद ही घाटे से उबरने की उम्मीद है। बर्तन बाजार, इलेक्ट्रानिक्स और घरेलू सामान सहित शादी-विवाह के कारोबारियों का भी कमोबेश यही हाल है।